ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (SSRB) ने ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के दोषी दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की सिफारिश को ठुकरा दिया है। बोर्ड का मानना है कि उसकी रिहाई से क्षेत्र में सांप्रदायिक अशांति फैल सकती है।

  • ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (SSRB) ने दारा सिंह की रिहाई की अर्जी खारिज कर दी।
  • बोर्ड ने चेतावनी दी है कि रिहाई से सांप्रदायिक तनाव और दंगे भड़क सकते हैं।
  • दोषी दारा सिंह 1999 के बहुचर्चित ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड में शामिल था।

ओडिशा में बहुचर्चित ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में सजा काट रहे मुख्य दोषी राबिंद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई पर फिलहाल गतिरोध पैदा हो गया है। राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (SSRB) ने दारा सिंह की रिहाई की सिफारिश को सिरे से खारिज कर दिया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओडिशा सरकार को इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने के निर्देश के बाद आया है।

सांप्रदायिक शांति को खतरा

SSRB की बैठक के दौरान यह चिंता जताई गई कि दारा सिंह की रिहाई से समाज में गंभीर परिणाम हो सकते हैं। बोर्ड ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यदि उसे रिहा किया जाता है, तो इससे क्षेत्र में सांप्रदायिक अशांति (Communal Disturbance) भड़कने की प्रबल संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 अगस्त 2026 को केन्जुघार जेल के बाहर 'दारा सेना' से जुड़े लगभग 200-250 लोगों ने एकत्र होकर उत्तेजक नारे लगाए थे, जो संभावित कानून-व्यवस्था की चुनौती को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अपराधी की रिहाई सामाजिक स्थिरता के लिए जोखिम बन सकती है।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जेल अधिकारियों द्वारा 'अच्छे व्यवहार' के आधार पर रिहाई की सिफारिश किए जाने के बावजूद, राज्य सरकार और समीक्षा बोर्ड ने सामाजिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है। दारा सिंह पिछले 26 वर्षों से अधिक समय से जेल में है, लेकिन उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए बोर्ड ने उसे फिलहाल रिहा करने के पक्ष में नहीं पाया।

मामले का ऐतिहासिक संदर्भ

यह मामला 22 जनवरी 1999 का है, जब ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों, फिलिप (10 वर्ष) और तिमोथी (6 वर्ष) को केन्जुघार जिले के मनोहरपुर में एक वैन के भीतर जिंदा जला दिया गया था। आरोपियों का आरोप था कि स्टेन्स लोगों का धर्म परिवर्तन करा रहे थे। इस जघन्य हत्याकांड ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कड़ी निंदा की गई थी।

कानूनी लड़ाई और वर्तमान स्थिति

दारा सिंह को पहले मृत्युदंड दिया गया था, जिसे बाद में ओडिशा उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास में बदल दिया। हालांकि, उसके सह-आरोपी महेंद्र हेम्बराम को अप्रैल 2025 में रिहा कर दिया गया था। दारा सिंह पर अन्य हत्याओं के मामले में भी आरोप हैं, जिसमें फादर अरुल डॉस की हत्या भी शामिल है।

क्या आप जानते हैं?: ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड भारतीय इतिहास के सबसे संवेदनशील धार्मिक अपराधों में से एक माना जाता है जिसने वैश्विक स्तर पर भारत की छवि पर प्रभाव डाला था।

Frequently Asked Questions

1. दारा सिंह को रिहा करने से क्यों रोका गया?
SSRB ने आशंका जताई है कि उसकी रिहाई से सांप्रदायिक दंगे और अशांति फैल सकती है।

2. ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड क्या था?
यह 1999 में हुआ एक हत्याकांड था जिसमें एक ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी और उनके दो बच्चों को जिंदा जला दिया गया था।