मलयालम अभिनेत्री रिमा कलिंगल ने त्रिशूर में चेंडा मेलम की अरण्गत्राम पूरी की, जिससे उनके व्यक्तिगत और पेशेवर सफर में नया मोड़ आया। इस घटना ने पारंपरिक कला को समकालीन मंच पर लाने की महत्वाकांक्षा को भी उजागर किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- रिमा कलिंगल ने चेंडा में आध्यात्मिक परिवर्तन किया
- मामंगम डांस अकादमी की “वत्तम” प्रस्तुति मॉस्को में होगी
- परम्परागत मेलम को समकालीन नृत्य के साथ मिलाने की नई पहल
रिमा कलिंगल, जो अपने तेज़‑तर्रार अभिनय और मंचीय प्रदर्शनों के लिए जानी जाती हैं, ने इस रविवार के दिन त्रिशूर के केरल संगीत नाटक अकादमी के ब्लैक बॉक्स थियेटर में चेंडा मेलम का अरण्गत्राम किया। हाथ में चेंडा के डंडे और बाएँ हाथ से पंचारी मेलम की ताल पर थिरकते हुए, उन्होंने अपने स्वयं के नृत्य स्कूल – माँगम डांस अकादमी – के साथियों को भी मंच पर गौरव दिलाया। यह प्रदर्शन इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ और भारतीय शास्त्रीय ध्वनि कला के पुनरुत्थान का संकेत बना।
पृष्ठभूमि और महत्व
चेंडा, दक्षिण भारत की पारम्परिक तालवाद्य में से एक, लगभग दो हज़ार साल पुरानी परम्परा को समेटे हुए है। इसका घुंघराले स्वर और सशक्त ध्वनि अक्सर कोरल नृत्य, पूराणिक महोत्सव और “पेंचरी मेलम” जैसे बड़े संगीत समूहों में सुनाई देती है। रिमा ने तीन वर्ष की आयु से ही नृत्य सीखना शुरू किया, परन्तु पिछले दशक में वह अपनी खुद की डांस कंपनी, माँगम डांस अकादमी, चलाती आ रही हैं। इस अकादमी ने “वत्तम” नामक एक अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट तैयार किया है, जो 21 जुलाई को मॉस्को में मंचित होगा। “वत्तम” शब्द चेंडा के वत्तम (ड्रमहेड) से आया है, जो जीवन के चक्र को दर्शाता है।
शिक्षा और प्रशिक्षण
रिमा और उनकी टोली ने प्रथम बार चेंडा सीखने के लिए केवल एक कोरियोग्राफी को लक्ष्य बनाया था, परन्तु गुरु विवेक कनीमनगालम के मार्गदर्शन में उन्होंने गहराई से अभ्यास किया। प्रतिदिन दो अतिरिक्त घंटे, आठ घंटे की नियमित नृत्य रिहर्सल के बाद, शारीरिक थकान और कलाइयों में पक्के घावों के बावजूद, कलाकारों ने इस परम्परा को अपनाया। कनीमनगालम ने प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षित किया, यहाँ तक कि दूरस्थ शहरों में रहने वाले कलाकारों को ऑनलाइन कक्षाएं भी प्रदान कीं।
समकालीन परिप्रेक्ष्य
परम्परागत “मेलम” को आधुनिक नृत्य के साथ मिलाने की पहल रिमा के सहयोगी संगीतकार संतोष माधव द्वारा की गई है, जो ताल को समकालीन अभिव्यक्ति के साथ मिश्रित करने में माहिर हैं। इस मिश्रण ने दर्शकों को यह समझाने का लक्ष्य रखा है कि स्थानीय कला अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उतनी ही प्रभावशाली हो सकती है। रिमा का मानना है, “स्थानीय ही अंतरराष्ट्रीय है; हमें अपनी जड़ों में गहराई से उतरना चाहिए और इसे एक समकालीन स्थान में पेश करना चाहिए, जहाँ आज के युवा कहें – ‘वाह, यह बहुत कूल है!’”
भविष्य की दिशा
रिमा कलिंगल ने अपने करियर की शुरुआत 2009 में फिल्म “रितु” से की और तब से कई समीक्षात्मक रूप से प्रशंसित भूमिकाएँ निभाई हैं, जैसे “22 फेमेल कोट्टायम” और “रानी पद्मिनी”। वह 2017 में “वुमेन इन सिनेमा कलेक्टिव” की सह‑स्थापना करके मलयालम फिल्म उद्योग में सुरक्षित और न्यायसंगत कार्य परिस्थितियों के लिए आवाज़ उठाती हैं। चेंडा सीखने का उनका व्यक्तिगत अनुभव उन्हें “नयी कला को अपनाने से जीवन बदल जाता है” का संदेश देता है, जो उनके प्रशंसकों और युवा कलाकारों के लिए प्रेरणादायक है।