लालित कला अकादमी, चेन्नई में आयोजित समारोह में TM कृष्ण ने सात नवोदित फोटो पत्रकारों को पुरस्कार और ₹30,000 की नगद राशि प्रदान की। यह सम्मान कला और पत्रकारिता के संगम को उजागर करने और उपेक्षित समुदायों की आवाज़ों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से दिया गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • TM कृष्ण–PARI पुरस्कार 2026 में सात युवा फोटो पत्रकारों को सम्मानित किया गया
  • प्रत्येक विजेता को ₹30,000 की नगद राशि और सार्वजनिक मंच मिला
  • पुरस्कार का उद्देश्य कला‑पत्रकारिता के संगम को सुदृढ़ करना और हाशिये पर रहने वाले समुदायों की कहानियों को उजागर करना है

चेन्नई के लालित कला अकादमी में आयोजित एक भव्य समारोह में TM कृष्ण–PARI पुरस्कार 2026 का वितरण हुआ, जिसमें सात युवा फोटो पत्रकारों को मान्यता दी गई। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को सम्मानित करता है जो कला और पत्रकारिता के बीच पुल बनाते हुए ऐतिहासिक रूप से हाशिये पर रहने वाले समुदायों की आवाज़ों को बढ़ाते हैं।

पुरस्कार के पीछे की कहानी

भारत के प्रमुख कर्नाटक गायनकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता TM कृष्ण ने इस समारोह में पुरस्कारों का अनावरण किया। यह पहल People’s Archive of Rural India (PARI) के संस्थापक‑संपादक पी. सैनीथ के साथ मिलकर चल रही है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण भारत की विविध कहानियों को दस्तावेज़ करना है। इस वर्ष के विजेताओं में K. मुकुश, कार्तिकेयन आर., कीर्ति एस., हेयरुनिशा के., नूर निशा के., K. रवीकुमार और सुबागोमति मुप्पिडाठी शामिल हैं।

प्रशिक्षक और परिप्रेक्ष्य

सभी सात विजेताओं को प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफ़र M. पळानी कुमार ने प्रशिक्षित किया है, जो “People’s Photographers Collective” के प्रमुख हैं। उनका मिशन न केवल तकनीकी कौशल सिखाना है, बल्कि सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय मुद्दों पर प्रकाश डालने वाली कहानियों को कैद करना भी है। इस वर्ष के फोटो प्रदर्शनों में जल संग्रह में महिलाओं की भूमिका, नमक‑पैन कार्य, पाल्मिरा उत्पाद संग्रह और लकड़ी‑कोयला उत्पादन जैसे श्रमिक जीवन के विविध पहलुओं को दर्शाया गया।

विचार और प्रतिक्रियाएँ

समारोह में TM कृष्ण ने कहा, “यह पुरस्कार एक छोटा कदम है, जो इन युवा फ़ोटोग्राफ़रों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है और उनके कार्य को मान्यता देता है।” अनुभवी पत्रकार एवं लेखक पी. सैनीथ ने महिलाओं द्वारा जल संग्रह में किए गए 80% समय के महत्त्व को उजागर करते हुए कहा, “यह तस्वीरें इस वास्तविकता को बखूबी पकड़ती हैं।” लेखिका जेयरानी और मानवाधिकार कार्यकर्ता थिरुर्मुगन गांधी ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर युवा फ़ोटोग्राफ़रों के सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डाला।

भविष्य की दिशा

यह पुरस्कार न केवल व्यक्तिगत फ़ोटोग्राफ़रों को प्रोत्साहित करता है, बल्कि भारतीय फ़ोटोजर्नलिज़्म में नई पीढ़ी के लिए एक मंच स्थापित करता है। जैसे-जैसे डिजिटल मीडिया का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे पहलें सामाजिक परिवर्तन को दृश्य रूप से अभिव्यक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।