विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दिवंगत श्री नंद किशोर गोयनका को एक सच्चा 'कर्मयोगी' बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। एसेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता गोयनका का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन संस्कृति, गौ सेवा और समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 96 वर्षीय दिवंगत श्री नंद किशोर गोयनका का निधन हो गया और उनका अंतिम संस्कार हरियाणा के अग्रोहा धाम में किया गया।
- विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल सहित कई गणमान्य लोगों ने उन्हें 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से ओतप्रोत 'कर्मयोगी' के रूप में याद किया।
- उन्होंने अग्रोहा धाम के विकास और गौ सेवा (गाय संरक्षण) में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी भूमिका निभाई।
भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में एक युग का अंत करते हुए, 96 वर्ष की आयु में श्री नंद किशोर गोयनका का निधन हो गया। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उन्हें एक दुर्लभ "कर्मयोगी" के रूप में याद किया, जिनका जीवन दर्शन, समर्पण और सांस्कृतिक मूल्य आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। एक वरिष्ठ उद्योगपति और एसेल ग्रुप (Essel Group) के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता के रूप में उनकी पहचान तो थी ही, लेकिन देश भर के सामाजिक संगठन उन्हें राष्ट्र के पुनरुत्थान, गौ सेवा और सामुदायिक संगठन के एक मूक वास्तुकार के रूप में याद कर रहे हैं।
आरएसएस के मूल्यों और 'राष्ट्र प्रथम' विचारधारा में रची-बसी जिंदगी
28 सितंबर 1930 को हरियाणा के हिसार में जन्मे श्री नंद किशोर गोयनका का जीवन कठिन परिश्रम, नैतिक सिद्धांतों और गहरी सांस्कृतिक जड़ों पर आधारित था। उनके शुरुआती संघर्षों ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ उनके जुड़ाव ने उनके दृष्टिकोण को राष्ट्र कल्याण के प्रति समर्पित किया। गोयनका के लिए राष्ट्रवाद केवल सार्वजनिक भाषणों का विषय नहीं था, बल्कि एक दैनिक अनुशासन था। उन्होंने संघ के मूल मंत्र "राष्ट्र प्रथम" को अपने जीवन में उतारा और बिना किसी व्यक्तिगत प्रसिद्धि या प्रचार के निस्वार्थ सेवा के प्रति समर्पित रहे।
विहिप में महत्वपूर्ण भूमिका और गौ सेवा के प्रति समर्पण
विहिप के साथ उनका जुड़ाव सक्रिय नेतृत्व और अटूट प्रतिबद्धता से भरा था। उन्होंने हरियाणा प्रांत के लिए विहिप के उपाध्यक्ष के रूप में और गौ रक्षा के लिए केंद्रीय समिति के एक सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनका दृढ़ विश्वास था कि हिंदू समाज को संगठित करना और उसकी सांस्कृतिक जड़ों की रक्षा करना हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गोयनका के गुण, कार्य और महानता अमर रहेगी, और गौ माता के सच्चे संरक्षक के रूप में उनकी सेवा सदैव याद रखी जाएगी।
अग्रोहा धाम: एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक गढ़ का पुनरुद्धार
महाराजा अग्रसेन की प्राचीन राजधानी, अग्रोहा, ऐतिहासिक "एक ईंट और एक रुपया" की परंपरा के माध्यम से समानता, सहयोग और लोक कल्याण का एक स्थायी प्रतीक है। श्री नंद किशोर गोयनका ने इस ऐतिहासिक विरासत को जन-जन तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया। उनके दूरदर्शी योगदान ने अग्रोहा धाम को केवल एक ऐतिहासिक स्थल से बदलकर एक विशाल, आधुनिक तीर्थ केंद्र में तब्दील कर दिया। आज यह अग्रवाल और वैश्य समाज की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय एकीकरण के एक जीवंत केंद्र के रूप में दुनिया भर के लाखों भक्तों को प्रेरित करता है।
बिना प्रचार के परोपकार: अत्यधिक सादगी की विरासत
देश के सबसे प्रभावशाली औद्योगिक परिवारों में से एक से संबंध रखने के बावजूद, गोयनका जी का जीवन अत्यंत सादगी से भरा था। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, धार्मिक ट्रस्टों और हाशिए पर मौजूद लोगों की चुपचाप मदद करके बिना प्रचार के परोपकार की मिसाल पेश की। वह अपने बेटों—डॉ. सुभाष चंद्रा, लक्ष्मी नारायण, जवाहर और अशोक गोयल के लिए मूल्यों की एक समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं, जो आज भी उनके संस्थानों के माध्यम से देश सेवा में योगदान दे रहे हैं।