मंगळुरु में INTACH और आर्ट कनारा ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक शानदार हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन कार्यक्रम में नीहारिका देराजे ने अपनी मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति दी।
- INTACH मंगळुरु चैप्टर और आर्ट कनारा ट्रस्ट ने मिलकर शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम आयोजित किया।
- गायक नीहारिका देराजे ने राग पुरीया धनश्री और राग दुर्गा की उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ दीं।
- कार्यक्रम में तबला, हारमोनियम और तानपुरा के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों का संगम रहा।
मंगळुरु के बल्लालबाग स्थित कोडियालगुथु सेंटर फॉर आर्ट एंड कल्चर में शनिवार को संगीत प्रेमियों के लिए एक शाम समर्पित थी। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट (INTACH) के मंगळुरु चैप्टर और आर्ट कनारा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन कार्यक्रम ने शहर की सांस्कृतिक जीवंतता को एक बार फिर प्रदर्शित किया।
मुख्य कलाकार नीहारिका देराजे ने अपनी सुरीली आवाज़ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंडित रविकिरण मणिपाल की शिष्या के रूप में, उन्होंने पिछले 12 वर्षों से इस कला को निखारा है। उन्होंने अपने गायन की शुरुआत राग पुरीया धनश्री से की, जिसमें 'सूरज डूब गयोरी' को विलंबित ख्याल में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद उन्होंने 'मोरा मोरा री' और 'तोरी जय जयकारतार' जैसे द्रुत ख्याल के माध्यम से संगीत की गति और जटिलता का परिचय दिया।
कलात्मक गहराई और वाद्य यंत्र
संगीत की इस यात्रा में नीहारिका देराजे को बेहतरीन संगतकारों का साथ मिला। श्रीवत्सा शर्मा ने तबले पर ताल का अनुशासन बनाए रखा, मेधा जी. भट्ट ने हारमोनियम पर मधुर स्वर जोड़े, और सामवेद जी. भट्ट ने तानपुरा के माध्यम से एक आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया। राग दुर्गा में 'जय जय जय दुर्गे माता' और 'नीको लगे माँ दर्शन' जैसी रचनाओं ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
शास्त्रीय संगीत की यह प्रस्तुति न केवल कौशल का प्रदर्शन है, बल्कि हमारी लुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम भी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के स्थानीय सांस्कृतिक आयोजन शहरी क्षेत्रों में कलात्मक शिक्षा और संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जब संस्थाएँ जैसे INTACH शास्त्रीय संगीत को मुख्यधारा के मंच प्रदान करती हैं, तो यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में भक्ति संगीत का प्रवाह देखा गया। इसमें कबीर के प्रसिद्ध भजन 'राम निरंजन न्यारा रे' और 'घाट घाट में पंछी बोलता', बंगाली भजन 'भुवनो मोहिनी', वचनों और पुरंदर दास के 'ई परिया सोबगु' का समावेश किया गया, जिसने कार्यक्रम को एक आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस कार्यक्रम का आयोजन कहाँ किया गया था?
उत्तर: यह कार्यक्रम मंगळुरु के बल्लालबाग स्थित कोडियालगुथु सेंटर फॉर आर्ट एंड कल्चर में आयोजित किया गया था।
प्रश्न 2: नीहारिका देराजे के गुरु कौन हैं?
उत्तर: नीहारिका देराजे पिछले 12 वर्षों से पंडित रविकिरण मणिपाल की शिष्या हैं।