अरनमुला पार्थसारथी मंदिर में 4 सितंबर को अष्टमी रोहिणी वल्लासदिया का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 52 गांवों के प्रतिनिधि और हजारों श्रद्धालु एक विशाल सामुदायिक भोज में शामिल होंगे।

  • अष्टमी रोहिणी वल्लासदिया 4 सितंबर को दोपहर से शुरू होगा।
  • सामुदायिक भोज में 1 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
  • 52 'कारा' (गांवों) के प्रतिनिधि और उनकी पारंपरिक 'पल्लिओडम' (सर्प नौकाएं) हिस्सा लेंगे।
  • इस सीजन में रिकॉर्ड 565 ऑफरिंग-आधारित वल्लासदिया निर्धारित किए गए हैं।

पतनमथिट्टा का आध्यात्मिक केंद्र, अरनमुला पार्थसारथी मंदिर, वर्तमान में अष्टमी रोहिणी वल्लासदिया की तैयारियों में जुटा है। 4 सितंबर को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि केरल की विरासत का एक गहरा सांस्कृतिक प्रतिबिंब है। इसमें 52 अलग-अलग कारा (गांवों) के प्रतिनिधि और उनके पारंपरिक पल्लिओडम (सर्प नौकाएं) शामिल होते हैं।

उत्सव की आधिकारिक शुरुआत दोपहर में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अध्यक्ष के. जयकुमार द्वारा ceremonial दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ होगी। इस आयोजन का पैमाना अत्यंत विशाल है, जिसमें एक लाख से अधिक लोगों को पारंपरिक भोज कराने की तैयारी की जा रही है। भोजन पकाने की प्रक्रिया मंदिर के गर्भगृह से लाए गए पवित्र दीप से अग्नि प्रज्वलित कर शुरू की गई, जिसमें 600 से अधिक लोग जुटे हुए हैं।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रशासन ने भोजन व्यवस्था को अलग-अलग खंडों में बांटा है। एक सामान्य सामुदायिक भोज मंदिर के दक्षिणी भोजन कक्ष में होगा, जबकि विशेष आमंत्रित अतिथियों, प्रायोजकों और ग्राम प्रतिनिधियों के लिए पंचजन्यम, कृष्णवेणी और विनायक ऑडिटोरियम में व्यवस्था की गई है। इसके लिए अलग-अलग कूपन जारी किए गए हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि वल्लासदिया केवल एक भोजन नहीं है; यह क्षेत्र के 52 गांवों को जोड़ने वाला एक सामाजिक-धार्मिक सूत्र है। पल्लिओडम का समन्वय और समुदाय का सामूहिक प्रयास ग्राम प्रतिनिधित्व की एक अनूठी लोकतांत्रिक संरचना को दर्शाता है जो सदियों से जीवित है। इस सीजन में 565 वल्लासदिया का रिकॉर्ड यह संकेत देता है कि नई पीढ़ी और प्रवासी भारतीयों में केरल की पारंपरिक रीति-रिवाजों के प्रति रुचि बढ़ी है।

अरनमुला वल्लासदिया केरल के आतिथ्य और आध्यात्मिक भक्ति के शिखर का प्रतिनिधित्व करता है, जो पाक कला की सटीकता को गहरे वैदिक परंपराओं के साथ मिलाता है।

इस भव्यता को बढ़ाते हुए, चेनापाडी गांव के भक्तों का एक समूह जुलूस के रूप में मंदिर में दही लाएगा, जिसे ध्वजदंड के नीचे अर्पित किया जाएगा। इसके अलावा, अम्बलप्पुझा अरविंदाक्षन नायर के नेतृत्व में एक विशेष टीम प्रसिद्ध अम्बलप्पुझा पलपायसम तैयार करेगी, जो इस भोज के मुख्य व्यंजनों में से एक होगा।

ऐतिहासिक रूप से, वल्लासदिया इस विश्वास से जुड़ा है कि भगवान पार्थसारथी (कृष्ण) सर्प नौकाओं द्वारा लाए गए चढ़ावे को स्वीकार करते हैं। यह परंपरा मंदिर परिसर को सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र में बदल देती है, जहाँ नौकाओं की लयबद्ध रोइंग और केले के पत्तों पर परोसे गए पारंपरिक केरल सद्य का स्वाद एक साथ मिलता है।

क्या आप जानते हैं?: अरनमुला की 'पल्लिओडम' (सर्प नौकाओं) को पवित्र माना जाता है और उन्हें स्वयं देवताओं के समान माना जाता है, जिन्हें 'पल्लिओडमसालाकल' नामक अलग मंदिरों में रखा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: अष्टमी रोहिणी वल्लासदिया में कौन भाग ले सकता है?
हालांकि 52 कारा के प्रतिनिधियों और विशेष अतिथियों के लिए आरक्षित सीटें हैं, लेकिन मंदिर परिसर में हजारों भक्तों के लिए एक विशाल सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया है।

प्रश्न 2: इस भोज में अम्बलप्पुझा पलपायसम का क्या महत्व है?
यह विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया एक विश्व प्रसिद्ध व्यंजन है, जो इस पवित्र भोज में प्रतिष्ठा और पारंपरिक स्वाद जोड़ता है।