प्रसिद्ध वास्तुकार कुलपत यंत्रसस्त ने बताया कि कैसे 'युगे युगीन भारत संग्रहालय' केवल सूचना का केंद्र नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह संग्रहालय भारत की 5,000 साल पुरानी सभ्यता को आधुनिक तकनीक और कला के साथ जोड़कर दुनिया के सामने पेश करेगा।

  • युगे युगीन भारत संग्रहालय दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय बनने की राह पर है।
  • वास्तुकार कुलपत यंत्रसस्त का लक्ष्य 'सूचना' के बजाय 'प्रेरणा' प्रदान करना है।
  • संग्रहालय में देश के कोने-कोने के शिल्पकारों और कलाकृतियों का समावेश होगा।
  • प्रदर्शनी कालानुक्रमिक होने के बजाय महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विषयों पर आधारित होगी।

नई दिल्ली के हृदय स्थल में स्थित नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालय, युगे युगीन भारत संग्रहालय में बदलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का नेतृत्व विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार और डिजाइनर कुलपत यंत्रसस्त कर रहे हैं, जिन्होंने न्यूयॉर्क के MET और पेरिस के लूव्र जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम किया है।

एक विशेष साक्षात्कार में, यंत्रसस्त ने साझा किया कि उनका उद्देश्य केवल भव्य इमारतों का निर्माण करना नहीं है, बल्कि भारत की विशालता और उसकी ऐतिहासिक गहराई को एक सूत्र में पिरोना है। वे चाहते हैं कि संग्रहालय में आने वाला हर व्यक्ति, चाहे वह तमिलनाडु से हो या कश्मीर से, खुद को जुड़ा हुआ महसूस करे। इसके लिए भारत के विभिन्न राज्यों के शिल्पकारों और कारीगरों को फर्नीचर, लकड़ी के काम और धातु शिल्प जैसे आंतरिक कार्यों में शामिल किया जा रहा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह परियोजना भारत की 'सॉफ्ट पावर' को वैश्विक स्तर पर पुनर्गठित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह केवल पुरानी वस्तुओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत की जड़ों को समझने का एक माध्यम है। इंटरनेट के युग में, जहाँ जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध है, संग्रहालयों की भूमिका अब केवल सूचना देना नहीं, बल्कि एक गहन भावनात्मक अनुभव प्रदान करना है।

संग्रहालय अब सूचना के व्यवसाय में नहीं हैं; हम प्रेरणा के व्यवसाय में हैं। आप यूट्यूब वीडियो से प्रेरणा नहीं ले सकते, लेकिन कला की उपस्थिति से ले सकते हैं।

यंत्रसस्त ने स्पष्ट किया कि इस संग्रहालय की प्रदर्शनी पारंपरिक कालानुक्रमिक (chronological) क्रम के बजाय महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित होगी। इसमें 5,000 साल पुरानी सभ्यता के निरंतरता वाले पहलुओं जैसे आभूषण, वास्तुकला, ज्योतिष और ब्रह्मांड विज्ञान (cosmology) को प्रदर्शित किया जाएगा। यह दृष्टिकोण दर्शकों को यह समझने में मदद करेगा कि आज का आधुनिक भारत कैसे अपनी प्राचीन जड़ों से जुड़ा हुआ है।

संग्रहालय का एक मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को उनकी जड़ों से जोड़ना है। यंत्रसस्त का मानना है कि भारत की सभ्यता दुनिया की उन दुर्लभ सभ्यताओं में से एक है जो बिना किसी बाधा के निरंतर चली आ रही है। यह संग्रहालय केवल अतीत का जश्न मनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसे भविष्य की प्रगति के लिए एक लॉन्चपैड के रूप में उपयोग करने के लिए बनाया जा रहा है।

Did You Know?: युगे युगीन भारत संग्रहालय को दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो दिल्ली के ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में स्थित होगा।

Frequently Asked Questions

1. युगे युगीन भारत संग्रहालय कब खुलेगा?
संग्रहालय की पहली गैलरी के 2026 के अंत तक खुलने की संभावना है।

2. इस परियोजना का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस परियोजना का नेतृत्व प्रसिद्ध वास्तुकार कुलपत यंत्रसस्त कर रहे हैं, जो एक विशेषज्ञ कंसोर्टियम का नेतृत्व करते हैं।