भारतीय शैक्षिक रंगमंच संस्थान (IIET) मैसूर में प्रसिद्ध कन्नड़ और मलयालम अभिनेत्री एवं पूर्व स्पीच थेरेपिस्ट इंदिरा नायर की याद में 'नुडी नमना' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कला और शिक्षा जगत की दिग्गज हस्तियां उनकी विरासत को याद करेंगी।
- मैसूर के हार्डविक स्कूल परिसर में 'नुडी नमना' श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन।
- इंदिरा नायर ने स्पीच थेरेपी और अभिनय दोनों क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाई।
- 75 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सोलो नाटक प्रस्तुत कर उम्र को चुनौती दी।
मैसूर स्थित भारतीय शैक्षिक रंगमंच संस्थान (IIET) आगामी रविवार शाम 6 बजे अपने परिसर में एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम 'नुडी नमना' का आयोजन करने जा रहा है। यह कार्यक्रम कन्नड़ और मलयालम रंगमंच तथा सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री और पूर्व स्पीच थेरेपिस्ट इंदिरा नायर की स्मृति में समर्पित है।
इस गरिमामयी आयोजन में रंगमंच और शिक्षा क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शिरकत करेंगी। इनमें वरिष्ठ थिएटर निर्देशक और अभिनेता रमेश्वरी वर्मा, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग (AIISH) की निदेशक प्रो. एम. पुष्पवती, वरिष्ठ थिएटर निर्देशक प्रो. एच.एस. उमेश, लेखक और निर्माता एस.पी. रघु और निरंतरा फाउंडेशन के श्रीनिवास पलहल्ली शामिल हैं। ये सभी दिग्गज कलाकार इंदिरा नायर के साथ अपने अनुभवों और उनकी कलात्मक यात्रा को साझा करेंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और करियर
4 फरवरी 1950 को चित्रदुर्ग में केरल मूल के परिवार में जन्मी इंदिरा नायर का जीवन अनुशासन और रचनात्मकता का अद्भुत संगम था। उन्होंने AIISH से स्पीच और हियरिंग में स्नातक किया और लगभग तीन दशकों तक उन बच्चों के लिए एक प्रशिक्षक के रूप में कार्य किया जो बोलने और सुनने में अक्षम थे। 1996 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद, उन्होंने अपनी कलात्मक प्रतिभा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
रंगमंच की दुनिया में उनका प्रवेश डॉ. ना. रत्न के मार्गदर्शन में हुआ। उन्होंने मैसूर के प्रसिद्ध थिएटर ग्रुप 'समथेंटो' और उनके प्रोडक्शन 'कडदिडा नीरु' के साथ काम किया। सिनेमा में उनकी शुरुआत 1972 में बी.वी. करणथ की फिल्म 'वंश वृक्ष' से हुई। उन्होंने 'रंगनायकी', 'ऐरावत', 'पेपे' और मलयालम फिल्म 'कुरुप' जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that Indira Nair's life serves as a blueprint for lifelong learning. Her transition from a medical professional (speech therapist) to a celebrated actress proves that professional stability and artistic passion can coexist. Her ability to perform her first solo play at 75 is a powerful statement against ageism in the performing arts.
Indira Nair's journey from the clinics of AIISH to the spotlights of the stage represents the true essence of a multidisciplinary life.
उनकी लघु फिल्म 'कडलस पूक्कल' ने उन्हें मैसूर और केरल फिल्म समारोहों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार दिलाए। आयोजकों का मानना है कि उनकी निष्ठा और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'नुडी नमना' कार्यक्रम कहाँ और कब आयोजित किया जा रहा है?
उत्तर: यह कार्यक्रम रविवार शाम 6 बजे मैसूर के हार्डविक स्कूल परिसर स्थित IIET कैंपस में आयोजित होगा।
प्रश्न 2: इंदिरा नायर का पेशेवर करियर अभिनय से पहले क्या था?
उत्तर: अभिनय में आने से पहले, वह लगभग 30 वर्षों तक AIISH में बोलने और सुनने में अक्षम बच्चों के लिए एक स्पीच थेरेपिस्ट के रूप में कार्यरत थीं।