पद्मश्री सम्मानित विद्वान सोलोमन पप्पेयाह ने अपनी नई साहित्यिक कृति और तमिल चर्चा कार्यक्रमों (पट्टिमंड्रम) के बदलते आयामों पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने शास्त्रीय साहित्य को आम जनता तक पहुँचाने के अपने मिशन पर प्रकाश डाला।
- सोलोमन पप्पेयाह ने शास्त्रीय तमिल कृति 'अगनानूरु' (Agananooru) का सरलीकृत संस्करण लिखा है।
- उनका मानना है कि भविष्य में 'पट्टिमंड्रम' केवल वाकपटुता नहीं, बल्कि विज्ञान जैसे गंभीर विषयों पर केंद्रित होंगे।
- पप्पेयाह ने सिनेमा के बजाय साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
तमिल संस्कृति में 'पट्टिमंड्रम' (पट्टिमंड्रम) केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि एक कला है जिसका गौरवशाली इतिहास रहा है। करैकुडी के साव गणेशन और कुंड्रकुडी अडिगल जैसे दिग्गजों ने स्वस्थ बहस और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए इस विधा को लोकप्रिय बनाया। आज के समय में, जब भी पट्टिमंड्रम का जिक्र होता है, सोलोमन पप्पेयाह का नाम सबसे पहले आता है, जिन्होंने टेलीविजन के माध्यम से इस कला को हर घर तक पहुँचाया।
86 वर्षीय पप्पेयाह, जिन्हें पिछले वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, अभी भी उतने ही उत्साही हैं। उन्होंने हाल ही में अपनी नवीनतम पुस्तक जारी की है, जो शास्त्रीय तमिल काव्य कृति 'अगनानूरु' का आधुनिक संस्करण है। पप्पेयाह का कहना है कि लॉकडाउन ने उन्हें इस प्रोजेक्ट पर काम करने का अवसर दिया। उनका लक्ष्य तमिल शास्त्रीय साहित्य को आम लोगों के लिए सुलभ बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा की समृद्धि को समझ सकें।
पप्पेयाह ने अपनी लेखन शैली की तुलना तिरुवल्लुवर, कंबन और भारतियार जैसे महान कवियों से की है। उन्होंने बताया कि आज की स्थिति यह है कि भाषा पढ़ाने वाले प्रोफेसर भी 'अगनानूरु' जैसे ग्रंथों को नहीं पढ़ते। इसलिए, उन्होंने भारतियार के मार्ग पर चलते हुए इसे सरल भाषा में प्रस्तुत किया है ताकि पाठकों के मन से शास्त्रीय साहित्य का डर निकल सके।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the transition of traditional debate formats into science-based discussions reflects a broader societal shift toward intellectual rigor over mere entertainment. When a figure as influential as Solomon Pappaiah advocates for the democratization of classical literature, it bridges the gap between academic elitism and mass consumption, ensuring the survival of linguistic heritage in a digital age.
"The next stage of Tamil debates will be on science, because there, you cannot just pass off with the gift of the gab alone."
पप्पेयाह ने अपने करियर की सबसे लोकप्रिय चर्चा 'थाया थारामा?' (माँ या पत्नी) को याद करते हुए बताया कि कैसे इस विषय ने राज्य के कोने-कोने में चर्चा छेड़ी। हालांकि, उनका मानना है कि भविष्य में पट्टिमंड्रम का स्वरूप बदलेगा। वे मानते हैं कि अब समय आ गया है कि इन मंचों पर विज्ञान जैसे विषयों पर बात हो, जहाँ केवल बोलने की कला (gift of the gab) काम नहीं आएगी, बल्कि ठोस ज्ञान की आवश्यकता होगी।
सिनेमा की बात करें तो, पप्पेयाह ने रजनीकांत की फिल्म 'शिवाजी' (2007) में अभिनय किया था। इसके बाद उन्हें 200 शब्दों से अधिक फिल्मों के प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वे खुद को फिल्मी पर्दे के बजाय साहित्यिक और शैक्षणिक हलकों में अधिक सहज महसूस करते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सोलोमन पप्पेयाह की नवीनतम पुस्तक किस बारे में है?
उत्तर: उनकी नवीनतम पुस्तक शास्त्रीय तमिल काव्य कृति 'अगनानूरु' का एक सरलीकृत और आधुनिक संस्करण है, जिसे आम जनता के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से लिखा गया है।
प्रश्न 2: पप्पेयाह के अनुसार भविष्य के पट्टिमंड्रम कैसे होंगे?
उत्तर: उनका मानना है कि भविष्य में ये चर्चाएँ विज्ञान जैसे विषयों पर केंद्रित होंगी, जहाँ केवल बोलने की कला के बजाय तथ्यात्मक ज्ञान की प्रधानता होगी।