मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच बाघ गलियारों से गुजरने वाली प्रस्तावित रेलवे लाइन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह लेख UPSC उम्मीदवारों के लिए पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और महत्वपूर्ण समसामयिकी विषयों का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करता है।
मुख्य बातें
- जुझारपुर और चिचौंडा के बीच प्रस्तावित तीसरी रेलवे लाइन दो अधिसूचित बाघ गलियारों और एक पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र से गुजरेगी।
- राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) ने इन-प्रिंसिपल मंजूरी दे दी है, लेकिन वन्यजीवों के लिए सुरक्षित ओवरपास बनाना अनिवार्य है।
- बाघ गलियारे आनुवंशिक प्रवाह (Genetic Flow) और विभिन्न प्रजातियों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- यह परियोजना 206 हेक्टेयर भूमि का उपयोग करेगी, जिसमें 74.69 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है।
हाल ही में, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) ने मध्य प्रदेश के जुझारपुर और चिचौंडा के बीच तीसरी रेलवे लाइन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी देने की सिफारिश की है। हालांकि, यह निर्णय एक गंभीर चिंता पैदा करता है क्योंकि यह प्रस्तावित मार्ग सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच के महत्वपूर्ण बाघ गलियारों को विभाजित कर सकता है।
पर्यावरण बनाम विकास: एक जटिल संतुलन
प्रस्तावित 160.6 किमी लंबा रेलवे खंड इटारसी-नागपुर मार्ग का हिस्सा है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, यह परियोजना दो अधिसूचित बाघ गलियारों और एक पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरती है। Central Railway द्वारा सुझाए गए शमन संरचनाओं, जैसे कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए ओवरपास, को वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर अंतिम रूप दिया जाना आवश्यक है।
BozokMedia विश्लेषण: क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल एक रेलवे परियोजना का नहीं है, बल्कि यह भारत के संरक्षण लक्ष्यों और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के बीच संघर्ष का प्रतीक है। बाघ एक 'अम्ब्रेला प्रजाति' (Umbrella Species) के रूप में कार्य करते हैं; उनकी सुरक्षा का अर्थ है पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा। यदि गलियारे खंडित होते हैं, तो इससे जैव विविधता और आनुवंशिक विविधता को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
वन्यजीव गलियारों का संरक्षण केवल बाघों के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्रोजेक्ट टाइगर
भारत में बाघों के संरक्षण के लिए 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' की शुरुआत की गई थी। इसके तहत देश भर में कई टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत, बाघों को 'अनुसूची I' (Schedule I) में रखा गया है, जो उन्हें सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. बाघ गलियारे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये गलियारे जानवरों को नए क्षेत्रों में जाने और आनुवंशिक प्रवाह (Genetic Flow) बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे प्रजातियों का अस्तित्व सुनिश्चित होता है।
2. वन्यजीवों के लिए रेलवे लाइन का क्या खतरा है?
रेलवे लाइनें वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को खंडित कर सकती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और प्रजातियों के अलगाव का डर रहता है।