पंचकुड़ा साइबर क्राइम पुलिस ने एक बी‑टेक स्नातक को 2.26 करोड़ रुपये की आयकर रिफंड धोखाधड़ी के मुख्य दिमाग के रूप में पकड़ लिया। जांच में पता चला कि कुल 13 करोड़ रुपये की लेन‑देन नौ बैंक खातों के माध्यम से हुई थी, जिससे साइबर अपराध की जटिलता उजागर हुई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 2.26 करोड़ रुपये की आयकर धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी
- धोखाधड़ी में 13 करोड़ रुपये के लेन‑देन का पता लगाया गया
- पाँच बैंक खातों और कई कंपनियों के माध्यम से धन का प्रवाह
पंचकुड़ा की साइबर क्राइम पुलिस ने बी‑टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट दलीप बी.आर. (दलीप राजगोडा) को कर्नाटक से गिरफ्तार किया, जिसे 2.26 करोड़ रुपये की आयकर रिफंड धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। दलीप को स्थानीय अदालत ने आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेजा और उसकी तलाशी में लैपटॉप व मोबाइल फोन बरामद किया गया।
पृष्ठभूमि और modus operandi
अपनी योजना में दलीप ने यूके‑आधारित एक एनआरआई की ई‑फाइलिंग आईटी रिटर्न को हैक करके, उसके पंजीकृत ई‑मेल, मोबाइल और बैंक विवरण बदल दिए। फिर उसने एक नकली संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल किया, जिससे अतिरिक्त 2.26 करोड़ रुपये का रिफंड मिल गया, जो नकली बैंक खातों में जमा किया गया। इस धोखाधड़ी में लगभग 13 करोड़ रुपये के लेन‑देन को नौ अलग‑अलग खातों में छिपाया गया, जिससे धन का पता लगाना कठिन हो गया।
जांच की प्रमुख खोजें
डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (क्राइम एंड ट्रैफिक) अमरिंदर सिंह ने बताया कि वित्तीय संस्थानों और आयकर विभाग के रिकॉर्ड की जांच से धन के प्रवाह का पता लगाया गया। कई खाता ट्रैन्क्शन को फर्जी कंपनियों के नाम पर किया गया, जबकि कमिशन के अनुसार, प्रत्येक लेन‑देन पर कमिशन काटने के बाद शेष राशि दलीप तक पहुँचाई गई। इस केस में दलीप पहले भी बेंगलुरु में आठ साइबरक्राइम मामलों में शामिल था और 2025 में इन्फोर्समेंट डिरेक्टरेट द्वारा उसी प्रकार के एक और मामले में गिरफ्तार किया गया था।
भविष्य की कार्रवाई और संभावित असर
पुलिस ने अब तक दलीप के साथियों में से एक, कन्हैया लाल को भी गिरफ्तार कर 5 लाख रुपये नकद बरामद किया है। अभी टीम कई राज्यों में छापेमारी कर रही है, ताकि अन्य संलिप्त व्यक्तियों को भी पकड़ सकें और फर्जी दस्तावेज़ों से खुले नकली बैंक खातों को बंद कर सकें। इस प्रकार की साइबर‑आधारित वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते केसों के मद्देनज़र, नियामक संस्थाओं को डिजिटल पहचान सुरक्षा और आयकर रिटर्न फाइलिंग के लिए सख्त नियंत्रण लागू करने की आवश्यकता है।