केंद्रीय विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि कुडंकुलम नाभिकीय संयंत्र से जुड़ी कोई संवेदनशील फ़ाइलें नहीं लीक हुईं। यह बयान रैनसमवेयर समूह 'World Leaks' द्वारा दावे के बाद आया, जिसने प्लांट के सामान्य Balance of Plant पैकेज की दस्तावेज़ी जानकारी को उजागर किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कुडंकुलम प्लांट की संवेदनशील फ़ाइलें नहीं ली गईं
  • लीक हुए दस्तावेज़ केवल पारंपरिक Balance of Plant पैकेज से जुड़े हैं
  • सरकार और NPCIL साइबर‑सुरक्षा जांच जारी रखेंगे

नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को बताया कि कुडंकुलम नाभिकीय विद्युत संयंत्र (KKNPP) से संबंधित कोई संवेदनशील डेटा नहीं लीक हुआ है। यह टिप्पणी रैनसमवेयर समूह ‘World Leaks’ द्वारा हजारों फ़ाइलें प्राप्त करने का दावा करने के बाद दी गई, जिसमें उन्होंने प्लांट के बुनियादी तकनीकी दस्तावेज़ों का उल्लेख किया था।

रैनसमवेयर दावे और NPCIL की स्पष्टता

‘World Leaks’ ने कहा था कि उन्होंने 19,000 से अधिक फ़ाइलें, जिनमें इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, विक्रेता विवरण और 2016‑2025 के बीच की मीटिंग रेकॉर्ड शामिल हैं, हासिल कर ली हैं। इसके जवाब में भारतीय नाभिकीय ऊर्जा निगम (NPCIL) ने स्पष्ट किया कि लीक हुई जानकारी केवल Balance of Plant (BoP) पैकेज के सामान्य सेवा सुविधाओं के लिए तैयार EPC अनुबंध से संबंधित है, जो थर्मल पावर प्लांट और अन्य प्रक्रिया उद्योगों में आम है।

कुडंकुलम प्लांट का महत्व

तमिलनाडु में स्थित कुडंकुलम नाभिकीय संयंत्र, रूस‑डिज़ाइन VVER प्रेशर्ड वाटर रिएक्टरों पर आधारित है, जिसमें दो यूनिट्स वर्तमान में चालू हैं और दो और यूनिट्स 2027 तक पूर्ण होने की योजना है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा में एक प्रमुख स्तंभ है, जिससे देश को स्वच्छ एवं निरंतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

साइबर सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव

जबकि NPCIL ने कहा है कि कोई भी फ़ाइल नाभिकीय सुरक्षा या सुरक्षा‑संबंधी प्रणालियों से जुड़ी नहीं है, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इंजीनियरिंग ब्लूप्रिंट और आपूर्तिकर्ता डेटा का दुरुपयोग संभावित प्रतिद्वंद्वी या दुष्ट तत्वों द्वारा संयंत्र के सहयोगी इन्फ्रास्ट्रक्चर को लक्ष्य बनाने में किया जा सकता है। इस प्रकार, संवेदनशील नहीं माने गए दस्तावेज़ भी रणनीतिक मूल्य रखते हैं।

जांच और आगे की कार्रवाई

भारत की कंप्यूटर आपातकाल प्रतिक्रिया टीम (CERT‑In) और NPCIL वर्तमान में घटना की विस्तृत जांच कर रहे हैं। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, जो 2018 में सार्वजनिक टेंडर के माध्यम से BoP अनुबंध जीत चुका है, ने भी एक तृतीय‑पक्ष डेटा सेंटर Yotta में स्थित सर्वर से हुए आंशिक डेटा ब्रीच को स्वीकार किया है और बताया कि सरकार को इस बारे में सूचित किया गया है।