ऑपरेशन कैमरास्वार्म के तहत हमलावरों ने यूक्रेन और रूस में 14,000 से अधिक डहुआ (Dahua) आईपी कैमरों को सफलतापूर्वक हैक कर लिया है। इस हमले में सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर हैकर्स ने कैमरों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है।

  • 'ऑपरेशन कैमरास्वार्म' के तहत 14,000 से अधिक डहुआ आईपी कैमरों को निशाना बनाया गया।
  • हमलावरों ने प्रमाणीकरण बाईपास करने के लिए तीन अलग-अलग सुरक्षा खामियों (Vulnerabilities) का उपयोग किया।
  • हैकर ने एक ऐसा बैकडोर अकाउंट बनाया जो फैक्ट्री रिसेट के बाद भी बना रहता है।
  • मुख्य रूप से रूस और CIS देशों के टेलीकॉम नेटवर्क को निशाना बनाया गया।

साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। Hunt.io की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 'ऑपरेशन कैमरास्वार्म' (Operation CameraSwarm) नामक एक बड़े पैमाने के हैकिंग अभियान ने यूक्रेन और रूस में 14,000 से अधिक Dahua आईपी कैमरों को सफलतापूर्वक कॉम्प्रोमाइज कर लिया है। यह हमला 17 जून से 22 जुलाई के बीच अंजाम दिया गया, जिसमें हमलावरों ने वैश्विक स्तर पर स्कैनिंग की और अंततः रूस और CIS (स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रमंडल) के टेलीकॉम नेटब्लॉक्स पर ध्यान केंद्रित किया।

जांच में पाया गया कि हमलावरों ने डहुआ कैमरों के खिलाफ एक शक्तिशाली 'ब्रूट-फोर्स इंजन' का उपयोग किया। इस अभियान के दौरान 12,324 अद्वितीय पतों को लक्षित किया गया। सबसे खतरनाक बात यह है कि हमलावरों ने 1,923 कैमरों पर एक स्थायी बैकडोर अकाउंट स्थापित कर दिया। यह अकाउंट p2pwn/p2password यूजरनेम और पासवर्ड का उपयोग करता है, जो एडमिन पासवर्ड बदलने या यहां तक कि डिवाइस को 'फैक्ट्री रिसेट' करने के बाद भी नहीं हटता है।

तकनीकी गहराई और खामियां

यह हमला केवल संयोग नहीं था, बल्कि एक अत्यंत सुनियोजित तकनीकी प्रक्रिया थी। हमलावरों ने प्रमाणीकरण को दरकिनार करने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुरक्षा खामियों का एक साथ उपयोग किया: CVE-2021-33044, CVE-2021-33045, और CVE-2024-39943। ये खामियां हमलावरों को बिना किसी वैध क्रेडेंशियल के पूर्ण एडमिनिस्ट्रेटर सत्र प्राप्त करने की अनुमति देती हैं।

यह हमला दर्शाता है कि कैसे पुरानी सुरक्षा खामियां आज भी आधुनिक IoT उपकरणों के लिए घातक साबित हो सकती हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह हमला केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर निगरानी (Surveillance) का एक उपकरण हो सकता है। जब हमलावर किसी देश के टेलीकॉम नेटवर्क और हजारों कैमरों को नियंत्रित करते हैं, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन जाता है। यह घटना IoT उपकरणों की असुरक्षित सुरक्षा संरचना पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि हमलावरों ने इस अभियान के लिए बुनियादी ढांचा हमले से कम से कम एक साल पहले ही तैयार कर लिया था। उनके पास एक ऐसा टूलकिट है जिसमें न केवल उनका अपना कोड है, बल्कि अन्य चार डेवलपर्स के संशोधित कोड भी शामिल हैं। यह संकेत देता है कि यह एक पेशेवर साइबर अपराध इकाई का काम हो सकता है।

Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि कई पुराने आईपी कैमरे आज भी इंटरनेट से सीधे जुड़े होते हैं और उनमें सुरक्षा अपडेट की कमी होती है, जिससे वे हैकर्स के लिए आसान शिकार बन जाते हैं?

Frequently Asked Questions

1. क्या फैक्ट्री रिसेट करने से हैक किया गया कैमरा सुरक्षित हो जाएगा?
नहीं, इस विशिष्ट हमले में हैकर्स ने ऐसा बैकडोर बनाया है जो फैक्ट्री रिसेट के बाद भी बना रहता है।

2. इस हमले का मुख्य लक्ष्य क्या था?
हालांकि सटीक उद्देश्य स्पष्ट नहीं है, लेकिन हमले का पैटर्न रूस और यूक्रेन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक निगरानी की ओर इशारा करता है।