हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनर ने बैंक म्यूल अकाउंट और घोस्ट सिम को समाप्त करने के लिए समन्वित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने हेतु नागरिकों को एक विशेष हैंडबुक प्रदान करने की घोषणा की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- म्यूल अकाउंट और घोस्ट सिम साइबर अपराध के प्रमुख साधन हैं।
- बैंकों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और कानून प्रवर्तन को मिलकर कार्रवाई करनी होगी।
- जागरूकता के माध्यम से रोकथाम, नुकसान की वसूली से अधिक प्रभावी है।
पुलिस कमिश्नर का चेतावनी संदेश
हैदराबाद सिटी पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनर ने शुक्रवार को आयोजित एक राउंडटेबल मीटिंग में कहा कि म्यूल बैंक अकाउंट और घोस्ट सिम कार्ड साइबर अपराध नेटवर्क की जीवनरेखा हैं। उन्होंने बताया कि केवल हैदराबाद में ही रोज़ लगभग ₹1 करोड़ का नुकसान हो रहा है, जो देश के स्तर पर साइबर धोखाधड़ी की तेज़ी का स्पष्ट संकेत है।
डिजिटल धोखाधड़ी के प्रमुख साधन
‘म्यूल अकाउंट’ वे बैंक खाते होते हैं जिन्हें अपराधी वैध व्यक्तियों के नाम पर खोलते हैं, जिससे धन को तुरंत फ्रीज़ या ट्रांसफर किया जा सके। ‘घोस्ट सिम’ ऐसे मोबाइल सिम हैं जो वास्तविक पहचान के बिना सक्रिय होते हैं, जिससे अनाम कॉल, एसएमएस और डेटा ट्रैफ़िक के माध्यम से फिशिंग, वॉटरिंग हॉल, वॉशिंग टेम्पलेट्स जैसी तकनीकें चलती हैं। इन दो बुनियादी घटकों को समाप्त करना, साइबर अपराधियों को उनकी आपूर्ति श्रृंखला से काटने जैसा है।
समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता
सज्जनर ने बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों, नियामकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की कि वे एकजुट होकर इस समस्या का समाधान करें। उन्होंने कहा, “जितनी जल्दी कोई पीड़ित धोखाधड़ी की रिपोर्ट करता है, उतनी ही अधिक संभावना है कि धन को फ्रीज़ करके वापस हासिल किया जा सके।” इस कारण से उन्होंने त्वरित रिपोर्टिंग के लिए एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन स्थापित करने का सुझाव भी दिया।
जागरूकता से रोकथाम
समारोह में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें पुलिस अधिकारी, बैंकर, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, टेलीकॉम पेशेवर, कानूनी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल थे। इस मंच पर ‘सिटिज़न्स हैंडबुक ऑन डिजिटल फ्रॉड अवेयरनेस एंड प्रिवेंशन’ जारी किया गया, जो आम नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी की पहचान, बचाव और प्रतिक्रिया के उपाय बताती है। सज्जनर ने कहा, “जागरूकता के माध्यम से रोकथाम, नुकसान के बाद पुनःप्राप्ति से कहीं अधिक प्रभावी है।”
भविष्य की दिशा
पैनल चर्चा में एआई‑सक्षम घोटाले, डीपफेक, डिजिटल पहचान की कमजोरियों और नियामक सुधारों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने बैंकों को मजबूत केवाईसी (KYC) प्रक्रियाओं, टेलीकॉम को सिम रजिस्ट्रेशन को कड़ाई से लागू करने और शिक्षा संस्थानों को साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम शामिल करने की सिफारिश की। अंततः, सभी हितधारकों को एक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी।