भारत और ब्रिटेन ने नई दिल्ली में आयोजित 25वें रक्षा परामर्श समूह की बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सामरिक स्वायत्तता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- भारत और ब्रिटेन ने 'रक्षा औद्योगिक रोडमैप' के तहत सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र (RMSCE) की स्थापना पर जोर।
- रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और ब्रिटेन के स्थायी रक्षा उप सचिव जेरेमी पोकलिंगटन के बीच उच्च स्तरीय बैठक।
नई दिल्ली में आयोजित 25वें भारत-यूके रक्षा परामर्श समूह की बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का निर्णय लिया गया है। भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और ब्रिटेन के रक्षा स्थायी उप सचिव (PUS) जेरेमी पोकलिंगटन के बीच हुई इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य केंद्र 'इंडिया-यूके विजन 2035' और '10-वर्षीय रक्षा औद्योगिक रोडमैप' रहा।
इस बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। यह सहयोग केवल उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की तकनीकों के सह-विकास और नवाचार पर आधारित है। दोनों देशों ने सशस्त्र बलों के बीच द्विपक्षीय आदान-प्रदान, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण के माध्यम से संबंधों को और अधिक गहरा करने पर सहमति व्यक्त की है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह रणनीतिक साझेदारी केवल द्विपक्षीय व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के बीच, भारत और ब्रिटेन का एक साथ आना समुद्री सुरक्षा के लिए एक मजबूत संकेत है।
भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग अब केवल लेनदेन से आगे बढ़कर सह-निर्माण और रणनीतिक स्वायत्तता की ओर बढ़ रहा है।
बैठक में इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) के तहत क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र (RMSCE) की स्थापना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। यह केंद्र हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कार्य करेगा। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए और आपसी सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
ब्रिटेन के स्थायी रक्षा उप सचिव जेरेमी पोकलिंगटन की यह पहली भारत यात्रा थी। अपने आधिकारिक दौरे के दौरान, उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और गांधी स्मृति संग्रहालय का दौरा किया। इसके अलावा, उन्होंने भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन एस राजा सुब्रमण्यम के साथ भी द्विपक्षीय बातचीत की, जिससे सैन्य स्तर पर सहयोग की गहराई का पता चलता है।
Frequently Asked Questions
1. भारत-यूके रक्षा सहयोग का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इसका मुख्य लक्ष्य 'विजन 2035' के माध्यम से रक्षा अनुसंधान, विकास और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करना है।
2. RMSCE क्या है?
यह क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया जा रहा है।