रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) की वार्षिक समीक्षा की, जिसमें आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी उत्पादन और निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया गया। रक्षा उत्पादन में ₹1.8 लाख करोड़ की ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है।

  • रक्षा क्षेत्र में भारत का कुल उत्पादन ₹1.8 लाख करोड़ तक पहुँचा।
  • 16 रक्षा PSUs का योगदान ₹1.29 लाख करोड़ रहा।
  • सात प्रमुख कंपनियों ने ₹3,951 करोड़ का लाभांश सरकार को सौंपा।
  • रक्षा मंत्री ने आयात पर निर्भरता कम करने और R&D पर जोर दिया।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में 16 रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) के वार्षिक प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत की रक्षा निर्माण क्षमताओं को मजबूत करना और देश को वैश्विक रक्षा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना था।

बैठक के दौरान, Hindustan Aeronautics Limited (HAL), Mazagon Dock Shipbuilders Limited, और Bharat Electronics Limited (BEL) जैसी सात प्रमुख रक्षा कंपनियों ने सरकार के इक्विटी शेयरों के लिए कुल ₹3,951 करोड़ का लाभांश चेक सौंपा। यह वित्तीय योगदान भारत के रक्षा औद्योगिक आधार की मजबूती को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि एक निर्माता बनने की राह पर है। वैश्विक संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध के समय केवल वही देश सुरक्षित हैं जिनके पास अपनी सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और त्वरित मरम्मत क्षमताएं हैं।

रक्षा उपक्रमों की प्रगति केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा अनिवार्यता है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि हाल के वैश्विक संघर्षों ने 'सर्ज प्रोडक्शन कैपेसिटी' (अचानक उत्पादन बढ़ाने की क्षमता) और महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) का मूल्यांकन केवल खर्च किए गए धन से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न नई तकनीक और बौद्धिक संपदा (IP) से किया जाना चाहिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत लंबे समय तक दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है। रक्षा उत्पादन का ₹1.8 लाख करोड़ के स्तर पर पहुँचना इस दिशा में एक मील का पत्थर है।

विवरणआंकड़े (2025-26)
कुल रक्षा उत्पादन₹1.8 लाख करोड़
16 DPSUs का योगदान₹1.29 लाख करोड़
कुल लाभांश (7 कंपनियां)₹3,951 करोड़
Did You Know?: भारत अब रक्षा निर्यात में भी तेजी से वृद्धि कर रहा है, जिसका लक्ष्य वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है।

Frequently Asked Questions

1. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है रक्षा उपकरणों, तकनीक और स्पेयर पार्ट्स के लिए विदेशी देशों पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाना।

2. किन प्रमुख कंपनियों ने लाभांश दिया है?
HAL, Mazagon Dock, BEL, BDL, GRSE, BEML और MIDHANI ने सरकार को लाभांश दिया है।