भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने ‘कुशा’ एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल का सफल परीक्षण किया, जिससे हवा में दुश्मन के बमबारी को रोकने की नई क्षमता प्राप्त हुई। यह कदम भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- ‘कुशा’ मिसाइल का पहला सफल परीक्षण पूरा हुआ।
- यह मिसाइल ऊँची ऊँचाई पर दुश्मन के हवाई हमलों को नष्ट कर सकती है।
- परियोजना भारतीय रक्षा नवाचार का प्रमुख उदाहरण है।
नई दिल्ली – भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आज ‘कुशा’ एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल का सफल परीक्षण घोषित किया। परीक्षण में मिसाइल ने लक्ष्यित बम को 15 किमी की ऊँचाई पर हवा में ही नष्ट कर दिया, जिससे इस तकनीक की प्रभावशीलता सिद्ध हुई।
‘कुशा’ को विशेष रूप से उच्च गति वाले बमों और पाइलट रहित हवाई हमलों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस मिसाइल की रेंज 30 किमी तक है और यह रडार‑गाइडेड इंटीसेप्शन तकनीक का उपयोग करती है, जिससे लक्ष्य पर सटीक प्रहार संभव होता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the successful test of ‘Kusha’ marks a strategic shift for India, reducing its reliance on foreign air‑defence systems and enhancing deterrence against regional adversaries.
“‘कुशा’ जैसे स्वदेशी एंटी‑एयर सिस्टम भारत की सुरक्षा रणनीति को आत्मनिर्भर बनाते हैं,” कहा रक्षा विशेषज्ञ प्रो. अजय सिंह।
इतिहास में, भारत ने 1990 के दशक में ‘त्रिशूल’ और ‘अग्नि’ जैसी मिसाइलों के साथ अंतरिक्ष और मिसाइल तकनीक में कदम रखा था। ‘कुशा’ इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, आधुनिक हवाई रक्षा में नई संभावनाएँ खोल रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: ‘कुशा’ मिसाइल किस प्रकार के हवाई खतरों को रोक सकती है?
उत्तर: यह हाई‑एयर बम, पाइलट रहित ड्रोन और कम ऊँचाई के एंटी‑एयरक्राफ्ट को प्रभावी रूप से नष्ट कर सकती है।
प्रश्न 2: क्या यह मिसाइल भारतीय सेना के अलावा अन्य बलों में उपयोग होगी?
उत्तर: वर्तमान में यह भारतीय वायु सेना के साथ-साथ सीमा रक्षा बलों के लिए भी विकसित की जा रही है।