रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि भौगोलिक सेना न केवल आपातकाल में सैन्य क्षमता बढ़ाती है, बल्कि आपदा राहत, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभाती है। उनका मानना है कि यह ‘नागरिक‑सैनिक’ भारत के ‘विकसित भारत’ लक्ष्य को साकार करने में मुख्य स्तम्भ है।
मुख्य बिंदु
- भौगोलिक सेना में लगभग 44,400 कर्मी 59 इकाइयों में कार्यरत हैं
- आपदा राहत, जलवायु कार्य, और ‘हर घर तिरंगा’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों में सक्रिय योगदान
- नागरिक‑सैनिक मॉडल के माध्यम से सैन्य‑सिविल एकीकरण को सुदृढ़ करना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अगस्त 2026 को रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की बैठक में कहा कि भौगोलिक सेना ‘नागरिक‑सैनिक’ की अवधारणा को प्रतिबिंबित करती है, जहाँ स्वयंसेवक अपने नागरिक पेशे जारी रखते हुए जरूरत पड़ने पर सैन्य सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।
भौगोलिक सेना संकट के समय तेज़ी से सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों का एक पूल बनाए रखती है, जिससे सेना को अल्प समय में अतिरिक्त बल उपलब्ध हो जाता है। इस शक्ति का उपयोग केरल बाढ़, ओडिशा चक्रवात, और असम के हालिया बाढ़ में सफलतापूर्वक किया गया।
पर्यावरण संरक्षण में भी इसका उल्लेखनीय योगदान है। सेना की इकोलॉजिकल टास्क फ़ोर्स ने लगभग 10 करोड़ पौधे लगाए हैं, जिनमें 80‑85% की जीवितता दर दर्ज की गई है, जिससे राष्ट्रीय हरित लक्ष्य को गति मिली है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि नागरिक‑सैनिक मॉडल न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, बल्कि सामाजिक सहभागिता और विकास के नए आयाम खोलता है, जिससे भारत की ‘विकसित भारत’ दृष्टि में गति मिलती है।
"भौगोलिक सेना का दोहरी भूमिका—सैन्य और सामाजिक—देश की लचीलापन को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है।"
Frequently Asked Questions
भौगोलिक सेना में भर्ती कैसे होती है? इच्छुक नागरिकों को शारीरिक और शैक्षणिक मानकों को पूरा करने के बाद चयन प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया जाता है।
भौगोलिक सेना के सदस्य कौन‑से अधिकार प्राप्त करते हैं? वे नियमित सेना के समान अधिकार, जैसे बीमा, पेंशन, और आपातकालीन प्रशिक्षण लाभ प्राप्त करते हैं।