दिल्ली उच्च न्यायालय ने दक्षिण दिल्ली की विवादित सैनिक फार्म कॉलोनी के नियमितीकरण पर निर्णय लेने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को दो महीने का समय दिया है। अदालत ने अवैध निर्माणों के बावजूद समाधान खोजने पर जोर दिया है।

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने सैनिक फार्म के भविष्य पर निर्णय लेने के लिए 2 महीने की समयसीमा निर्धारित की है।
  • अदालत ने अवैध निर्माणों को स्वीकार किया लेकिन समाधान खोजने का निर्देश दिया।
  • केंद्र, दिल्ली सरकार, DDA और MCD को मिलकर योजना बनाने को कहा गया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली के विभिन्न अधिकारियों को दक्षिण दिल्ली की प्रतिष्ठित लेकिन विवादित सैनिक फार्म कॉलोनी के नियमितीकरण पर दो महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि हालांकि कॉलोनी में किए गए निर्माण अवैध थे, लेकिन अब अधिकारियों को इस जटिल मुद्दे का एक व्यावहारिक समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

समाधान की दिशा में कदम

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से सुझाव दिया कि अधिकारियों को केवल तोड़फोड़ करने के बजाय एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अदालत ने कहा, "आप विकास शुल्क वसूल सकते हैं। आप कुछ प्रकार के निर्माणों को बचा सकते हैं। आप एक ऐसी योजना ला सकते हैं जहां कुछ निर्माणों को गिराना आवश्यक हो। सर्वेक्षण करें, योजना बनाएं और जितना हो सके बचाने का प्रयास करें।"

इस आदेश के कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नगर निगम दिल्ली (MCD) के अधिकारियों को एक साथ बैठक करने और 13 अगस्त, 2025 के पूर्व आदेश के अनुसार विचार-विमर्श करने का निर्देश दिया गया है।

कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएँ

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने तर्क दिया कि सरकार एक व्यापक दृष्टिकोण तभी अपना सकती है जब DDA द्वारा तैयार दिल्ली मास्टर प्लान (MPD) 2047 को केंद्र द्वारा अनुमोदित और औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया जाए। अदालत ने इस प्रशासनिक बाधा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को दो महीने के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई नवंबर में तय की है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सैनिक फार्म का मुद्दा वर्षों से अदालत में लंबित है। यह क्षेत्र अपनी हरियाली और संपन्न निवासियों के लिए जाना जाता है, लेकिन निर्माण नियमों के उल्लंघन के कारण यह हमेशा विवादों के घेरे में रहा है। अप्रैल 2022 में, अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह मुद्दा अब और अधिक लटकाए रखने का समय नहीं है और अधिकारियों को इसका अंतिम समाधान निकालना ही होगा।

अदालत का रुख स्पष्ट है: अवैधता को स्वीकार करते हुए भी मानवीय और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
क्या आप जानते हैं?: सैनिक फार्म दिल्ली के सबसे हरे-भरे और महंगे आवासीय क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जो अपनी अनूठी बनावट के लिए प्रसिद्ध है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. दिल्ली उच्च न्यायालय ने क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को सैनिक फार्म के नियमितीकरण पर 2 महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

2. अधिकारियों को किन विकल्पों पर विचार करने को कहा गया है?
अधिकारियों को विकास शुल्क वसूलने, सर्वेक्षण करने और कुछ निर्माणों को बचाने के साथ-साथ कुछ को गिराने की योजना बनाने को कहा गया है।