केरल के कोट्टायम जिले में भारी बारिश के कारण आए भूस्खलन और नदियों के उफान ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें एक 11 वर्षीय बच्चे सहित तीन लोगों की जान चली गई है।
मुख्य बातें
- कोट्टायम में भूस्खलन और बाढ़ से 3 लोगों की मौत।
- पूनजार में एक घर मलबे में दबने से मां-बेटे की जान गई।
- 10 राहत शिविरों में 327 लोगों को शरण दी गई।
- मीनाचिल और मणिमाला नदियां उफान पर, व्यापारिक क्षेत्रों में पानी घुसा।
केरल के कोट्टायम जिले में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है। शुक्रवार शाम से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने पूर्वी उच्च क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और नदियों के जलस्तर में भारी वृद्धि कर दी है। इस आपदा में अब तक तीन लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है, जिनमें एक 11 वर्षीय बालक भी शामिल है।
पूनजार में मलबे का कहर
सबसे दुखद घटना पूनजार थेक्केकेरा के पय्यानिथोट्टम में हुई, जहाँ शनिवार तड़के एक भूस्खलन ने एक घर को मलबे के नीचे दबा दिया। इस हादसे में 27 वर्षीय जोसेफिन जोनी और उनकी 49 वर्षीय मां रेजीना जोनी की मौत हो गई। मलबे के नीचे दबने से पहले पहाड़ी का एक हिस्सा उनके घर से सटकर ढह गया था। गनीमत रही कि जोसेफिन के पिता और उनकी दो बेटियां उस समय घर पर मौजूद नहीं थे और सुरक्षित बच गए।
क्यों यह चिंता का विषय है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रकार की अचानक होने वाली आपदाएं जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों को दर्शाती हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इडामाला पहाड़ी से हुआ यह भूस्खलन उस क्षेत्र में पहले कभी नहीं देखा गया था। यह दर्शाता है कि अत्यधिक वर्षा के कारण पहाड़ी ढलान अब पहले से कहीं अधिक अस्थिर हो गए हैं।
अत्यधिक वर्षा और ढीली मिट्टी का संयोजन अचानक आने वाले भूस्खलन के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।
इसके अलावा, वकथनम पंचायत में एक 11 वर्षीय बालक, मिलन के. शिनू की जलभराव वाले गड्ढे में गिरने से मौत हो गई। बाढ़ के कारण मीनाचिल और मणिमाला नदियों ने किनारों को तोड़ दिया, जिससे एराट्टुपेट्टा और पाला जैसे शहरों के व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भारी नुकसान हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि यह स्थिति 2018 की विनाशकारी बाढ़ की याद दिलाती है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कोट्टायम में वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: जिले में राहत कार्य जारी हैं और 10 राहत शिविरों में 327 लोगों को आश्रय दिया गया है।
प्रश्न 2: किन नदियों में बाढ़ का खतरा सबसे अधिक है?
उत्तर: मीनाचिल और मणिमाला नदियां वर्तमान में उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में खतरा बना हुआ है।