आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में 5.25% रेपो दर को बरकरार रखा, जबकि यूएस‑ईरान संघर्ष के कारण आर्थिक भविष्य अनिश्चित है, जैसा कि गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा।
मुख्य बिंदु
- रेपो दर 5.25% पर स्थिर
- इज़रानी संघर्ष के कारण आर्थिक दृष्टिकोण धुंधला
- आरबीआई ने आर्थिक लचीलापन को उजागर किया
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती दिखा रही है। इस बयान के बाद मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया।
यह निर्णय यूएस‑ईरान युद्ध के दौरान आया, जो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर रहा है। आरबीआई ने इस जोखिम को ध्यान में रखते हुए मौद्रिक नीति में सतर्कता बरती है, जिससे महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास दोनों को संतुलित किया जा सके।
Historical Background
पिछले दो वर्षों में आरबीआई ने रेपो दर को कई बार समायोजित किया, सबसे हालिया परिवर्तन 2023 में 5.00% से 5.25% किया गया था। इस वृद्धि का मुख्य कारण महंगाई को काबू में लाना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि रेपो दर में स्थिरता भारतीय कंपनियों के ऋण लागत को स्थिर रखेगी, जिससे निवेश निर्णयों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, यह विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता को भी समर्थन देता है।
"ब्याज दरों में कोई अचानक बदलाव न होने से वित्तीय स्थिरता बनी रहती है," कहा वित्तीय विशेषज्ञ डॉ. रीता सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: रेपो दर में स्थिरता का अर्थ क्या है?
उत्तर: इसका मतलब है कि बैंकों को आरबीआई से उधार लेने की लागत नहीं बढ़ेगी, जिससे ऋण की उपलब्धता बनी रहेगी।
प्रश्न 2: यूएस‑ईरान युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: युद्ध से वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और निर्यात‑आय में संभावित गिरावट हो सकती है, जिससे आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है।