सरकारी नई ग्रामीण रोजगार योजना VB‑G RAM G ने जुलाई 2026 में पिछले साल की तुलना में 49.94% तक रोजगार में गिरावट दर्ज की। यह गिरावट दो दशकों पुराने एमजीएनआरईजीएस से संक्रमण के बाद आई है, जबकि मौसमी समस्याएँ भी असर डाल रही हैं।
Key Takeaways
- जुलाई 2026 में VB‑G RAM G के तहत केवल 7.67 करोड़ व्यक्ति‑दिन उत्पन्न हुए।
- यह आंकड़ा पिछले साल के 15.33 करोड़ व्यक्ति‑दिनों से 49.94% कम है।
- रोजगार की मांग करने वाले 98% ग्रामीण घरों को काम दिया गया, लेकिन कुल households में 51.45% गिरावट आई।
मुख्य आँकड़े
अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में VB‑G RAM G योजना ने 7.67 करोड़ व्यक्ति‑दिन उत्पन्न किए, जबकि उसी महीने 2025 में एमजी‑एनआरईजीएस ने 15.33 करोड़ व्यक्ति‑दिन प्रदान किए थे। व्यक्ति‑दिन वह माप है जो एक व्यक्ति द्वारा एक कार्यदिवस में किए गए काम को दर्शाता है।
साथ ही, इस महीने योजना के तहत 68.94 लाख घरों ने रोजगार की माँग की, जो पिछले साल 1.42 करोड़ घरों से 51.45% कम है। यह पाँच वर्षों में सबसे कम स्तर है, जहाँ औसत घरों की संख्या 1.72 करोड़ थी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) दो दशकों से भारत की प्रमुख ग्रामीण रोजगार नीति रही है। 2026 में इसे वैकल्पिक VB‑G RAM G (विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन) से बदल दिया गया, जिसका उद्देश्य उच्च वेतन और अधिक कार्यदिवस प्रदान करना था।
हालांकि नई योजना में बेहतर शर्तें हैं, लेकिन शुरुआती महीनों में रोजगार सृजन में गिरावट देखी गई, जो मौसमी अनियमितताओं और किसानों की मौसमी फसल स्थितियों से जुड़ी हो सकती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a sharp decline in rural job generation can dampen aggregate demand in agrarian economies, potentially slowing overall GDP growth. जब ग्रामीण आय घटती है, तो उपभोक्ता खर्च और कृषि निवेश दोनों पर असर पड़ता है।
"रोजगार में इस गिरावट का दीर्घकालिक प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिरता को चुनौती देगा," कहा कृषि अर्थशास्त्री डॉ. राकेश सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या VB‑G RAM G योजना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है?
उत्तर: हाँ, अब तक उत्पन्न 63% व्यक्ति‑दिन महिलाओं द्वारा किए गए हैं, जो नियत 33% से काफी अधिक है।
प्रश्न 2: इस गिरावट का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि अनियमित मानसून, खारि फसल के कम क्षेत्रफल और योजना के कार्यान्वयन में प्रारंभिक चुनौतियां प्रमुख कारण हैं।