सरकार ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.25-0.5% MDR शुल्क लगाने की योजना बना रही है। यह कदम पिछले एक दशक की 'कैशलेस इंडिया' नीति के विपरीत है और डिजिटल वित्तीय समावेशन को प्रभावित कर सकता है।
मुख्य बिंदु
- ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.25% से 0.5% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) प्रस्तावित है।
- यह बदलाव टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (संशोधन) बिल, 2026 के माध्यम से लाया जा रहा है।
- हालांकि यह केवल 5% लेनदेन को प्रभावित करेगा, लेकिन यह कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का लगभग 65% होगा।
- विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों के निवेश प्रोत्साहन में कमी आ सकती है।
भारत सरकार ने हाल ही में टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (संशोधन) बिल, 2026 के माध्यम से भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इस संशोधन के जरिए सरकार को विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड पर शुल्क निर्धारित करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब ₹2,000 से ऊपर के UPI लेनदेन पर 0.25% से 0.5% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जा सकता है।
नीतिगत उलटफेर और ऐतिहासिक संदर्भ
2016 के विमुद्रीकरण (Demonetisation) के बाद, सरकार ने देश को 'लेस-कैश' अर्थव्यवस्था की ओर धकेलने के लिए UPI को एक मुख्य हथियार बनाया। UPI की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसका 'जीरो-MDR' मॉडल था, जिसने व्यापारियों और उपभोक्ताओं को नकदी छोड़कर डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। आज UPI दुनिया के बड़े कार्ड नेटवर्क से अधिक लेनदेन प्रोसेस करता है। लेकिन अब, जिस सफलता को सरकार ने खुद इंजीनियर किया, उसे टैक्स के जरिए सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि एक बुनियादी नीतिगत बदलाव है। जब भुगतान प्रणालियों पर टैक्स लगाया जाता है, तो इसका बोझ अंततः या तो उपभोक्ता पर पड़ता है या उन मध्यस्थों (बैंकों और PSPs) पर, जो इस बुनियादी ढांचे का रखरखाव करते हैं। यदि बैंक इस लागत को वहन करते हैं, तो वे धोखाधड़ी रोकथाम और सेवा विश्वसनीयता में निवेश कम कर सकते हैं, जिससे डिजिटल इकोसिस्टम की गुणवत्ता गिर सकती है।
"डिजिटल भुगतान रेल पर टैक्स लगाना वित्तीय समावेशन के उन लक्ष्यों के विपरीत है जिन्हें सरकार 2016 से हासिल करने की कोशिश कर रही है।"
वित्तीय समावेशन पर प्रभाव
UPI ने अनौपचारिक लेनदेन को एक डिजिटल ट्रेल में बदल दिया है, जिससे औपचारिक अर्थव्यवस्था और टैक्स अनुपालन को बढ़ावा मिला है। डिजिटल लेनदेन के आधार पर ही अब छोटे व्यापारियों को क्रेडिट (ऋण) देना आसान हुआ है। यदि इस रेल पर शुल्क लगाया जाता है, तो लोग वापस नकदी की ओर लौट सकते हैं, जिससे वित्तीय समावेशन की पूरी प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
| विशेषता | वर्तमान स्थिति (Zero MDR) | प्रस्तावित स्थिति (MDR लागू) |
|---|---|---|
| लागत (₹2,000+) | नि:शुल्क | 0.25% - 0.5% शुल्क |
| व्यापारी प्रोत्साहन | उच्च (कोई लागत नहीं) | कम (लागत का बोझ) |
| डिजिटल अपनाने की गति | अत्यंत तीव्र | संभावित मंदी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या छोटे भुगतानों (जैसे दूध या सब्जी) पर भी शुल्क लगेगा?
उत्तर: नहीं, प्रस्तावित शुल्क केवल ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर लागू होगा। छोटे भुगतानों को इससे बाहर रखा गया है।
प्रश्न 2: इस शुल्क का भुगतान कौन करेगा?
उत्तर: आधिकारिक तौर पर यह शुल्क व्यापारियों (Merchants) पर लगेगा, लेकिन व्यवहार में इसे ग्राहकों पर डाला जा सकता है या बैंकों द्वारा वहन किया जा सकता है।