जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) मुद्रास्फीति मामूली रूप से घटकर 9.78% पर आ गई है। ईंधन, बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी इस गिरावट का मुख्य कारण रही है।
मुख्य बातें
- WPI मुद्रास्फीति जून के 9.87% से गिरकर जुलाई में 9.78% हो गई।
- ईंधन और बिजली की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
- नए आधार वर्ष (2022-23) के तहत यह पहली बार है जब महीने-दर-महीने गिरावट देखी गई है।
भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति में जुलाई के महीने में मामूली राहत देखी गई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में मुद्रास्फीति 9.78% रही, जो जून में 9.87% थी। यह गिरावट मुख्य रूप से ईंधन, बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई कमी के कारण हुई है।
विशेष बात यह है कि सरकार के नए आधार वर्ष (2022-23) के तहत जारी किए गए आंकड़ों में यह पहली बार है जब मुद्रास्फीति में महीने-दर-महीने (month-on-month) की गिरावट दर्ज की गई है। इस वित्त वर्ष की शुरुआत से ही WPI ऊपर की ओर बढ़ रहा था, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में युद्ध और स्ट्रेत ऑफ हॉर्मुज में ब्लॉकड के चलते कच्चे तेल और उर्वरक की बढ़ती लागत थी।
महत्वपूर्ण विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि हालांकि थोक स्तर पर राहत मिली है, लेकिन विनिर्मित उत्पादों (manufactured products) की मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई है, जो 7.48% से बढ़कर 8.29% हो गई है। यह संकेत देता है कि आपूर्ति श्रृंखला के कुछ हिस्सों में अभी भी दबाव बना हुआ है।
ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में सुधार थोक स्तर पर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती लागत चिंता का विषय बनी हुई है।
महंगाई दर का तुलनात्मक विवरण
| श्रेणी | जून दर (%) | जुलाई दर (%) |
|---|---|---|
| कुल WPI | 9.87% | 9.78% |
| ईंधन और बिजली | 27.41% | 20.05% |
| खाद्य वस्तुएं | 5.49% | 5.44% |
| विनिर्मित उत्पाद | 7.48% | 8.29% |
इससे पहले जारी आंकड़ों से पता चला था कि जुलाई में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) जून के 4.38% से बढ़कर 4.45% हो गई थी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में नीतिगत दरों को 5.25% पर स्थिर रखा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मुद्रास्फीति को मापने के लिए WPI और CPI का उपयोग किया जाता है। WPI थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को मापता है, जबकि CPI सीधे उपभोक्ताओं को प्रभावित करता है। हाल ही में आधार वर्ष में बदलाव किया गया है ताकि डेटा अधिक सटीक और वर्तमान आर्थिक स्थितियों के अनुरूप हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. WPI में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
ईंधन, बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आना मुख्य कारण है।
2. क्या विनिर्माण क्षेत्र में महंगाई बढ़ी है?
हाँ, विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति जून के 7.48% से बढ़कर जुलाई में 8.29% हो गई है।