जैपुर के एक स्कूल में 14 वर्षीय अमैरा की मौत से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज ने उसके सहपाठियों द्वारा किए गए बुलीइंग को उजागर किया है। परिवार ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए क़ानून में कड़ी सज़ा की माँग की है।

जैपुर, राजस्थान – पिछले हफ्ते अमैरा, एक 14 वर्षीय छात्रा, की स्कूल में हुई मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। सीबीएसई (CBSE) की रिपोर्ट के अनुसार, अमैरा को कई बार सहपाठियों द्वारा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न (बुलीइंग) का सामना करना पड़ा, और यह तथ्य स्कूल की सीसीटीवी कैमरों में दर्ज है।

घटना का क्रम

सीसीटीवी फुटेज ने दिखाया है कि अमैरा को उसके कक्षा के कुछ छात्रों ने लगातार तंग किया, उसे अपमानित किया और शारीरिक रूप से धकेला। इस उत्पीड़न के बाद वह स्कूल परिसर से बाहर निकलते समय गिर गई और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि स्कूल के प्रिंसिपल, चेयरमैन और कक्षा शिक्षक ने इस स्थिति में उचित कार्रवाई नहीं की, जिससे अमैरा की सुरक्षा पूरी तरह से खतरे में पड़ गई।

परिवार की प्रतिक्रिया और न्याय की माँग

अमैरा के परिवार ने पुलिस की निष्क्रियता को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने घटना के बाद तुरंत कार्रवाई नहीं की, जिससे अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया में देरी हुई। परिवार ने जूवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट के तहत कड़ी सज़ा की मांग की है, न केवल कक्षा शिक्षक के खिलाफ बल्कि स्कूल के प्रिंसिपल और चेयरमैन के खिलाफ भी।

सीबीएसई रिपोर्ट और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव

सीबीएसई ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कई स्कूलों को बुलीइंग रोकथाम के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया। इस घटना ने भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों, मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और छात्र सुरक्षा नीतियों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों को न केवल निगरानी कैमरों की संख्या बढ़ानी चाहिए, बल्कि शिक्षकों को बुलीइंग पहचानने और तुरंत कार्रवाई करने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।

भविष्य की दिशा

जिला प्रशासन ने कहा है कि वे इस मामले की पूरी जांच करेंगे और दोषियों को कड़ी सज़ा दिलाने के लिए सभी कानूनी उपाय अपनाएंगे। साथ ही, राज्य सरकार ने स्कूल सुरक्षा समिति के गठन की घोषणा की है, जिसमें छात्र, अभिभावक और विशेषज्ञ शामिल होंगे, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।