असम के स्कूलों में 1.54 लाख नियोजित शिक्षक पदों में से 20% खाली हैं, जिसमें प्राथमिक स्तर पर 18,801 पद शामिल हैं। शिक्षा मंत्री रनोज पेगु ने भर्ती योजना और एकल‑शिक्षक स्कूलों की समस्याओं पर प्रकाश डाला।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 30,032 खाली शिक्षक पद
- पहले स्तर में 18,801 पद खाली
- सरकारी भर्ती योजना 2 लाख युवाओं के लिए
असम विधानसभा में स्कूल शिक्षा मंत्री रनोज पेगु ने बताया कि राज्य के 1,54,078 नियोजित शिक्षक पदों में से लगभग 20% यानी 30,032 पद अभी भी खाली हैं। यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ते अभाव को उजागर करता है, विशेषकर प्राथमिक शिक्षा में।
डेटा का विस्तृत विभाजन
मात्रा‑पर‑स्तर के अनुसार देखें तो प्राथमिक विद्यालयों में 18,801 पद खाली हैं, जिनमें निचली प्राथमिक में 11,662 और ऊपरी प्राथमिक में 7,139 पद शून्य हैं। मध्य और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर भी 11,231 शिक्षक पद खाली हैं, जिससे सम्पूर्ण शिक्षा प्रणाली में बड़ी खाई बन रही है।
एकल‑शिक्षक स्कूल और छात्र‑शिक्षक अनुपात की समस्या
असम में 44,103 राज्य‑प्रायोजित स्कूल हैं, जिनमें 39,531 प्राथमिक स्कूल शामिल हैं। इनमें से 7,948 स्कूल अभी भी अनिवार्य 30:1 छात्र‑शिक्षक अनुपात (PTR) का पालन नहीं कर पा रहे हैं, और कई स्कूल एक ही शिक्षक द्वारा संचालित हैं। यह स्थिति पिछले कुछ वर्षों में नामांकन में गिरावट का एक प्रमुख कारण बन रही है।
सरकारी प्रतिक्रिया और भर्ती रणनीति
सरकार ने इस समस्या को हल करने के लिए दो प्रमुख कदम उठाए हैं: पहला, 2 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियों में नियुक्त करने की विस्तृत योजना, जिसमें शैक्षिक संस्थानों की रिक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी। दूसरा, एक तीन‑स्तरीय रणनीति अपनाई गई है—नियमित भर्ती, जिलों के भीतर पुनर्संरचना और स्कूलों का विलय—जिससे शिक्षक शक्ति को अधिकतम किया जा सके।
भविष्य के प्रभाव और विशेषज्ञ दृष्टिकोण
यदि यह रिक्तियों को शीघ्र भरने की प्रक्रिया धीमी रही, तो असम की शैक्षिक प्रगति पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ शिक्षा की पहुँच पहले ही सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भर्ती ही नहीं, बल्कि स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार और शिक्षक प्रशिक्षण पर भी समान ध्यान देना आवश्यक है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सके।