शिवमोग्गा में अक्शरा दासोहे योजना के तहत काम करने वाले मध्यान्ह भोजन कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि, स्वास्थ्य बीमा और निजीकरण विरोध में बड़े पैमाने पर धरना दिया। इस प्रदर्शन में राज्य के प्रमुख ट्रेड यूनियन एफ़िलिएशन की भागीदारी थी, जो सरकार को नीति पुनरावलोकन की मांग कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कर्नाटक में मध्यान्ह भोजन कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और योजना के निजीकरण को रोकने का इशारा किया।
  • शिवमोग्गा में आयोजित धरने में सैकड़ों कर्मचारियों ने डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय के सामने मार्च किया।
  • कर्मचारियों ने 7,000 रुपये मासिक वेतन, स्वास्थ्य बीमा और 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि की मांग की।

शिवमोग्गा, कर्नाटक – राज्य के शैक्षणिक समर्थन कार्यक्रम अक्शरा दासोहे के अंतर्गत कार्यरत मध्याह्न भोजन कर्मचारियों ने शुक्रवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। यह आंदोलन कर्नाटक राज्य अक्शरा दासोहे कर्मचारियों संघ के नेतृत्व में हुआ, जो इंडियन ट्रेड यूनियनों के सेंटर (CITU) से संबद्ध है। कर्मचारियों ने अपने वेतन में उचित वृद्धि और योजना के निजीकरण के विरुद्ध सख़्त विरोध जताया।

पृष्ठभूमि और योजना का महत्व

अक्शरा दासोहे योजना को 25 वर्ष पहले शुरू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूल में बच्चों की अनुपस्थिति को कम करना और शैक्षिक सहभागिता को बढ़ावा देना था। इस योजना के तहत, गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त दोपहर भोजन प्रदान किया जाता है, जिससे उन्हें नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जाता है। हालांकि, कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मौद्रिक महंगाई के बावजूद सरकार ने इस योजना के लिए अनुदान नहीं बढ़ाया, बल्कि इसे निजी संस्थानों को सौंप दिया, जिससे योजना के मूल उद्देश्य को क्षति पहुँची।

कर्मचारियों की माँगे

प्रदर्शनकारी समूह ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक मेमो में कई प्रमुख माँगे रखी हैं: वेतन को 7,000 रुपये तक बढ़ाना, सभी 12 महीनों की वेतनभुक्ति सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना, और उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालयों के फैसले के अनुरूप न्यूनतम वेतन लागू करना। साथ ही, निजीकरण के कारण नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, क्योंकि कई सार्वजनिक स्कूलों का बंद होना और निजी संस्थानों का हस्तक्षेप इस क्षेत्र को अस्थिर बना रहा है।

मुआवजा और सुरक्षा की मांग

कर्मचारियों ने यह भी माँग की है कि यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु कर्तव्य के दौरान हो तो सरकार को 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान करनी चाहिए। यह मांग उन परिवारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए है, जो इस सामाजिक योजना के निरंतर संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रमुख नेता और भविष्य की राह

शिवमोग्गा जिले के संघ अध्यक्ष हनुमम्मा, जनरल सेक्रेटरी सुनीथा, कोषाध्यक्ष सूर्यकला और अन्य कई नेता इस आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे। उनका मानना है कि सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, अन्यथा योजना का विफल होना और विद्यार्थियों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ेगा। इस प्रकार, यह प्रदर्शनी न केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा का मंच बन गई है, बल्कि कर्नाटक के शैक्षणिक विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ भी सिद्ध हो रही है।