राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एमबीबीएस की 50 अतिरिक्त सीटों को मंजूरी दे दी है, जिससे कुल सीटें बढ़कर 250 हो गई हैं। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से प्रभावी होने वाला यह निर्णय जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • जीएमसी श्रीनगर में एमबीबीएस सीटों की संख्या 200 से बढ़कर 250 हो जाएगी।
  • यह बदलाव आगामी शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से प्रभावी होगा।
  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने इसके लिए आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

जम्मू-कश्मीर में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को एक बड़ी मजबूती मिली है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने श्रीनगर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एमबीबीएस (MBBS) की सीटों में 50 सीटों की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस नए फैसले के बाद, आगामी शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से जीएमसी श्रीनगर में एमबीबीएस सीटों की कुल संख्या 200 से बढ़कर 250 हो जाएगी। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को इस आधिकारिक निर्णय की पुष्टि की।

मंजूरी की प्रक्रिया और नियामक ढांचा

एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 28(3) के तहत औपचारिक रूप से लेटर ऑफ परमिशन (LoP) जारी कर दिया है। यह मंजूरी अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस (UGMSR), 2023 के प्रावधानों के तहत किए गए एक बेहद कड़े और विस्तृत मूल्यांकन के बाद दी गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी जीएमसी श्रीनगर को 20 अतिरिक्त सीटों की मंजूरी मिली थी, जो इस संस्थान के निरंतर विकास को दर्शाती है।

जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य ढांचे पर प्रभाव

इस सीट वृद्धि का सबसे बड़ा लाभ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के स्थानीय छात्रों और समग्र स्वास्थ्य प्रणाली को मिलेगा। घाटी में चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों की कमी को दूर करने में यह निर्णय ऐतिहासिक साबित हो सकता है। अधिक सीटें होने से स्थानीय स्तर पर ही डॉक्टरों की एक नई पीढ़ी तैयार होगी, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक और उन्नत चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

राष्ट्रीय स्तर पर जीएमसी श्रीनगर का बढ़ता कद

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि सीटों में इस बढ़ोतरी ने जीएमसी श्रीनगर की स्थिति को देश के अग्रणी मेडिकल कॉलेजों में और अधिक मजबूत कर दिया है। बुनियादी ढांचे के विकास, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और संकाय (फैकल्टी) की गुणवत्ता के मामले में यह कॉलेज लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। यह कदम देश के डॉक्टर-मरीज अनुपात को वैश्विक मानकों के करीब लाने के भारत सरकार के व्यापक मिशन का भी हिस्सा है।