तीन साल में सरकारी स्कूलों ने इंटरनेट कवरेज 46.2% से 63.1% तक बढ़ाया, जिससे निजी एवं सहयोगी स्कूलों के साथ अंतर घटा। स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर उपलब्धता में भी उल्लेखनीय सुधार दिखाई दिया, जबकि डिजिटल पुस्तकालय अभी भी कम हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सरकारी स्कूलों का इंटरनेट कवरेज 2025-26 में 63.1% तक पहुंचा
- स्मार्ट क्लासरूम का राष्ट्रीय स्तर पर कवरेज 33.9% हो गया
- डिजिटल लाइब्रेरी अभी भी 7% से कम स्कूलों में उपलब्ध
राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने डिजिटल साक्षरता को प्राथमिकता दी है, लेकिन पिछले दशकों में सरकारी स्कूलों में बुनियादी इंटरनेट कनेक्शन और तकनीकी उपकरणों की कमी स्पष्ट थी। 2023-24 में केवल 46.2% सरकारी स्कूलों में इंटरनेट उपलब्ध था, जो निजी और सहयोगी संस्थानों की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत अंक का अंतर दर्शाता था।
तीन साल में कनेक्टिविटी में उछाल
उद्यमी डेटा संग्रह प्रणाली UDISE+ के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि 2025-26 तक सरकारी स्कूलों का इंटरनेट कवरेज 63.1% तक पहुंच गया, जिससे अंतर घटकर 16 प्रतिशत अंक रह गया। यह वृद्धि न केवल नेटवर्क विस्तार बल्कि राज्य‑स्तरीय पहल जैसे डिजिटल इंडिया और स्मार्ट स्कूल मिशन के प्रभाव का परिणाम है। गोवा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने 99% से अधिक कवरेज हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल अभी भी 19.7% पर बना हुआ है।
स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर की उपलब्धता
स्मार्ट क्लासरूम की राष्ट्रीय कवरेज 24.4% से बढ़कर 33.9% हो गई, जिसमें सरकारी स्कूलों ने 11 अंक की वृद्धि दर्ज की। कंप्यूटर की उपलब्धता 69.9% तक पहुंची, लेकिन सरकारी स्कूलों में यह प्रतिशत 66.9% रहा, जबकि निजी संस्थानों में 80% तक पहुंचा। शिक्षण में कंप्यूटर के उपयोग की दर भी सरकारी स्कूलों में 59.4% पर सीमित है, जो प्रशिक्षक प्रशिक्षण और सामग्री की अपर्याप्तता को दर्शाता है।
डिजिटल लाइब्रेरी: अभी भी बड़ी कमी
डिजिटल पुस्तकालयों की उपलब्धता सिर्फ 7.1% स्कूलों में है, जिसमें सरकारी स्कूलों का हिस्सा 5.7% है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जबकि बुनियादी कनेक्टिविटी में प्रगति हुई है, कंटेंट एवं संसाधन प्रदान करने की दिशा में अभी भी बड़े अंतर हैं।
भविष्य की दिशा और नीति‑निर्माताओं के लिए सिफारिशें
NEP ने “सुरक्षित, समावेशी और प्रभावी सीखने का वातावरण” बनाने का लक्ष्य रखा है। इसे साकार करने हेतु आवश्यक है कि राज्य और केंद्र सरकारें डिजिटल लाइब्रेरी के विस्तार, शिक्षक क्षमता निर्माण, और ग्रामीण‑शहरी अंतर को घटाने वाली विशेष योजनाओं पर अधिक फोकस करें। निरंतर निगरानी और डेटा‑आधारित सुधार से डिजिटल विभाजन को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।