केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने संसद सदस्यों से वीबीएसए बिल 2025 के विरोध में आवाज उठाने को कहा, क्योंकि यह विधेयक संघीयता, शैक्षणिक स्वायत्तता और राज्य की शक्ति को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि यह बिल केंद्र को अत्यधिक अधिकार देगा और मौजूदा शैक्षणिक संस्थानों की स्वतंत्रता को छीन लेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • वीबीएसए बिल 2025 राज्य के शैक्षणिक अधिकारों को घटाता है
  • केंद्रीय सरकार को नीति‑निर्धारण में अनिवार्य शक्ति मिलती है
  • केरल के सांसदों से बिल के वर्तमान रूप को अस्वीकार करने का आग्रह

केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने सभी केरल सांसदों को एक पत्र के माध्यम से वीबीएसए (विकसित भारत शिक्षा संस्थान) बिल 2025 के विरोध में एकजुट होने का आग्रह किया। यह बिल, जो सरकार द्वारा उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को सुधारने के इरादे से पेश किया गया है, वास्तव में शैक्षिक प्रबंधन को केंद्र के हाथों में केंद्रित कर रहा है।

बिल की मुख्य औपचारिकताएँ

विधान में क्लॉज 49 का उल्लेख किया गया है, जो राज्य द्वारा पास किए गए असंगत नियमों को केंद्र के नियमों से ऊपर रखने की अनुमति देता है। यह प्रावधान भारतीय संविधान के समन्वित संघीयतावाद के सिद्धांत के विरुद्ध है, जहाँ राज्यों को शिक्षा के क्षेत्र में अपनी नीति‑निर्धारण की स्वतंत्रता मिली है।

शिक्षा संस्थानों की शासन संरचना पर प्रभाव

बिल के अनुसार, नया शिखर निकाय विकसित भारत शिक्षा संस्थान (VBSA) स्थापित किया जाएगा, जो वर्तमान में कार्यरत यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई को प्रतिस्थापित करेगा। इसमें राज्यों की प्रतिनिधित्व को केवल सीमित घूर्णी (रोटेशन) रूप में रखा गया है, जिससे राज्य की आवाज़ कम हो जाएगी। इस संरचना को लेकर कई शैक्षणिक विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं, क्योंकि यह संस्थानों की स्वायत्तता को खतरे में डाल सकता है।

राज्य‑केंद्र संबंधों पर संभावित परिणाम

केरल के मंत्री ने बताया कि यदि यह विधेयक बिना संशोधन के पारित हो गया, तो यह केंद्र को नीति‑निर्धारण में बंधन‑रहित अधिकार देगा और मौजूदा नियामक निकायों को कमज़ोर करेगा। इससे न केवल शैक्षिक संस्थानों की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा, बल्कि राज्य‑केंद्र सहयोग की नींव भी कमजोर होगी।

आगे का रास्ता

रोजी जॉन ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिल को पुनः विचार किया जाना चाहिए, ताकि यह संघीय ढाँचे को सुदृढ़ करे, न कि उसे क्षीण करे। उन्होंने अनुरोध किया कि केरल के सांसद इस मुद्दे को पार्लियामेंट में उठाएँ और केंद्र‑राज्य साझेदारी को मजबूत करने वाले संशोधन की मांग करें।