लगभग 20 लाख छात्रों ने 21 जून को आयोजित NEET‑UG परीक्षा दी, जिसमें लुधियाना के आर्यन गुप्ता ने 99.9999 प्रतिशतile के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। कुल 11.21 लाख उम्मीदवारों ने मेडिकल, डेंटल और अन्य स्वास्थ्य कोर्स में प्रवेश हेतु पात्रता हासिल की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • आर्यन गुप्ता ने प्रथम स्थान हासिल किया
  • 11.21 लाख उम्मीदवारों ने पात्रता प्राप्त की
  • NEET‑UG में महिलाओं की भागीदारी 58 % से अधिक

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने गुरुवार को NEET‑UG 2026 के परिणाम घोषित किए, जिसमें लुधियाना के आर्यन गुप्ता ने 99.9999 प्रतिशतile के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल किया। हरियाणा के पंशुल बंसल ने AIR 2 के साथ दोसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि राजस्थान के अप्लाक्षा गोयल ने AIR 3 पर जगह बनाई।

परीक्षा का पैमाना और पृष्ठभूमि

NEET‑UG, भारत की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा, 21 जून को 5,440 केंद्रों पर 551 शहरों में तथा विदेश के 14 शहरों में आयोजित हुई। इस बार लगभग 20 लाख aspirants ने परीक्षा दी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2 % बढ़ोतरी दर्शाती है। परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों को भी भाग लेने का अवसर मिला।

पात्रता और राज्य‑वार प्रदर्शन

NTA ने बताया कि कुल 11.21 लाख उम्मीदवारों ने मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य स्वास्थ्य विज्ञान कोर्सों में प्रवेश हेतु पात्रता प्राप्त की। शीर्ष 138 रैंकधारकों में महाराष्ट्र ने सबसे अधिक प्रतिनिधित्व किया (22 उम्मीदवार), उसके बाद राजस्थान (18) और पंजाब (11) आए। तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में प्रत्येक नौ-नौ उम्मीदवार और गुजरात एवं दिल्ली में आठ-आठ उम्मीदवार रहे। यह विविधता दर्शाती है कि मेडिकल शिक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा अब केवल पारंपरिक शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं रही।

उम्मीदवारों की सफलता के पीछे की कहानी

टॉप रैंकधारकों ने निरंतर तैयारी, अनुशासित अध्ययन दिनचर्या और परिवारिक समर्थन को अपने सफलता के प्रमुख कारण बताया। उदाहरण के तौर पर, बिहार के आयुष भालोटिया (AIR 4) ने 710 अंक प्राप्त किए और उन्होंने कोटा में 5‑7 घंटे स्वअध्ययन तथा 6 घंटे कक्षा‑आधारित पढ़ाई का उल्लेख किया। इसी प्रकार, कई उम्मीदवारों ने बताया कि उन्होंने प्रतिदिन 10 घंटे तक पढ़ाई की और शिक्षकों की सलाह का पालन किया।

भविष्य की दिशा

यह परिणाम दिखाता है कि मेडिकल शिक्षा की प्रतिस्पर्धा में अनुशासन और समर्थन अभी भी प्रमुख कारक हैं, जबकि 58 % से अधिक महिला उम्मीदवारों की भागीदारी लिंग संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक संकेत देती है। NTA ने यह भी कहा कि परिणाम समय पर घोषित किए गए हैं, जिससे काउंसलिंग प्रक्रिया और कॉलेज प्रवेश समय सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।