तेलंगाना के हेल्थकेयर रिफॉर्म्स डॉक्टर्स एसोसिएशन (HRDA) ने कामिनेनी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) द्वारा एमबीबीएस छात्रों से अवैध रूप से फीस वसूलने के खिलाफ KNRUHS से जांच की मांग की है।
मुख्य बातें
- HRDA ने KIMS नरकेतपल्ली पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
- कॉलेज पर छात्रों से पांचवें वर्ष की फीस एडवांस में वसूलने का आरोप है।
- छात्रों को हॉस्टल से निकालने और क्लास में प्रवेश रोकने जैसी धमकियां दी जा रही हैं।
- KNRUHS से तत्काल जांच और फीस वापसी की मांग की गई है।
हैदराबाद: तेलंगाना के हेल्थकेयर रिफॉर्म्स डॉक्टर्स एसोसिएशन (HRDA) ने एक गंभीर मामला उठाते हुए कलोजी नारायण राव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (KNRUHS) से कामिनीनी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS), नरकेतपल्ली के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन का आरोप है कि यह संस्थान एमबीबीएस छात्रों से अवैध रूप से पांचवें वर्ष की ट्यूशन फीस वसूल रहा है।
एसोसिएशन द्वारा कुलपति को सौंपे गए एक ज्ञापन में कहा गया है कि 2022 और 2024 बैच के छात्रों के अभिभावकों ने शिकायत की है कि कॉलेज विश्वविद्यालय के निर्देशों का उल्लंघन कर रहा है। KNRUHS के 21 अप्रैल के आदेशानुसार, ट्यूशन फीस को साढ़े चार साल के लिए पांच समान किस्तों में विभाजित किया जाना चाहिए था, लेकिन KIMS कथित तौर पर पूरे पांचवें वर्ष की फीस अभी से मांग रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चिकित्सा शिक्षा में वित्तीय अनियमितताएं न केवल छात्रों के भविष्य को अंधकारमय बनाती हैं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की विश्वसनीयता को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। यदि निजी संस्थान विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर मनमानी फीस वसूली करते हैं, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक खतरनाक मिसाल पेश कर सकता है।
चिकित्सा शिक्षा में पारदर्शिता की कमी छात्रों और उनके परिवारों पर अनुचित वित्तीय बोझ डालती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा, एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि फीस न भरने पर छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इसमें हॉस्टल से बेदखल करने की धमकी देना, फीस जमा होने के बावजूद कमरे न देना और डे-स्कॉलर्स को कैंपस में प्रवेश या कक्षाओं में बैठने से रोकना शामिल है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में चिकित्सा शिक्षा की फीस का निर्धारण राज्य सरकारों और संबंधित स्वास्थ्य विश्वविद्यालयों द्वारा किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में, निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा 'डोनेशन' और 'अतिरिक्त शुल्क' के नाम पर वसूली के कई मामले सामने आए हैं, जिसके कारण नियामक निकायों को सख्त दिशा-निर्देश जारी करने पड़े हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. HRDA ने क्या मांग की है?
HRDA ने KNRUHS से मामले की जांच करने, अवैध वसूली को रोकने और छात्रों को राहत देने की मांग की है।
2. KNRUHS का पिछला निर्देश क्या था?
विश्वविद्यालय ने निर्देश दिया था कि फीस को साढ़े चार साल के लिए पांच किस्तों में लिया जाए।