तमिलनाडु की वित्त मंत्री डॉ. एन. मैरी विल्सन ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए टीवीके सरकार का पहला बजट पेश किया, जिसमें नीट (NEET) का कड़ा विरोध किया गया। बजट में स्कूली शिक्षा के लिए ₹44,527 करोड़ आवंटित किए गए हैं और कॉलेज छात्रों के लिए 'वेत्री लैपटॉप योजना' की घोषणा की गई है।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- तमिलनाडु सरकार ने कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल प्रवेश प्रणाली को वापस लाने की मांग की है।
- स्कूली शिक्षा विभाग के लिए ₹44,527 करोड़ और उच्च शिक्षा के लिए ₹8,393 करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया गया है।
- कॉलेज के छात्रों के लिए 'वेत्री लैपटॉप योजना' और मदुरै में एक विशेष लॉ कॉलेज की स्थापना की घोषणा की गई है।
तमिलनाडु की नवनिर्वाचित टीवीके (TVK) सरकार ने अपने पहले बजट में शिक्षा क्षेत्र को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की उपस्थिति में राज्य की वित्त मंत्री डॉ. एन. मैरी विल्सन ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। बजट भाषण के दौरान, वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को समाप्त करने और कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश की पुरानी प्रणाली को बहाल करने का पुरजोर आग्रह किया।
राज्य सरकार का तर्क है कि नीट परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों के साथ अन्याय करती है, जो महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। इस मांग के साथ ही सरकार ने राज्य के छात्रों को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय आवंटन की घोषणा की है।
शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक आवंटन
बजट में स्कूली शिक्षा विभाग के लिए रिकॉर्ड ₹44,527 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, उच्च शिक्षा विभाग को भी ₹8,393 करोड़ का बड़ा हिस्सा मिला है। सरकार ने कॉलेज जाने वाले छात्रों के लिए बहुप्रतीक्षित 'वेत्री लैपटॉप योजना' (Vetri Laptop Scheme) की शुरुआत की है, जिसके तहत छात्रों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य भर में ₹90 करोड़ की अनुमानित लागत से पांच नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITIs) स्थापित किए जाएंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
तमिलनाडु का नीट (NEET) परीक्षा के साथ विरोध का एक लंबा और जटिल इतिहास रहा है। साल 2007 में, राज्य सरकार ने एक कानून पारित कर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए सभी प्रवेश परीक्षाओं को समाप्त कर दिया था, जिससे ग्रामीण छात्रों को केवल उनके बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल और इंजीनियरिंग में प्रवेश मिल सके। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश भर में नीट को अनिवार्य कर दिया गया, जिसके बाद से तमिलनाडु लगातार इस केंद्रीय व्यवस्था के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ रहा है।
Why This Matters
बोझोकमीडिया (BozokMedia) विश्लेषण से पता चलता है कि टीवीके सरकार का यह पहला बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी है। शिक्षा पर इतना भारी निवेश और नीट का विरोध सीधे तौर पर राज्य के युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं को आकर्षित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
"नीट के खिलाफ कड़े वैचारिक रुख को बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर के शैक्षिक वित्तपोषण के साथ जोड़कर, तमिलनाडु शिक्षा में राज्य की स्वायत्तता को फिर से परिभाषित करने का प्रयास कर रहा है।" - डॉ. अरुणा कुमार, शिक्षाविद।
इसके अतिरिक्त, मदुरै में शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से एक विशेष लॉ कॉलेज स्थापित करने की भी घोषणा की गई है, जो दक्षिणी जिलों के छात्रों के लिए कानूनी शिक्षा के नए द्वार खोलेगा।
| क्षेत्र / योजना | आवंटन (रुपये) | मुख्य आकर्षण |
|---|---|---|
| स्कूली शिक्षा विभाग | ₹44,527 करोड़ | बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी एकीकरण को बढ़ावा |
| उच्च शिक्षा विभाग | ₹8,393 करोड़ | विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए वित्त पोषण |
| औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITIs) | ₹90 करोड़ | 5 नए ITI की स्थापना |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'वेत्री लैपटॉप योजना' क्या है?
उत्तर: यह तमिलनाडु सरकार द्वारा कॉलेज के छात्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई एक योजना है, जिसके तहत पात्र छात्रों को मुफ्त लैपटॉप प्रदान किए जाएंगे।
प्रश्न 2: तमिलनाडु सरकार नीट (NEET) का विरोध क्यों कर रही है?
उत्तर: राज्य सरकार का मानना है कि नीट परीक्षा राज्य बोर्ड के छात्रों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों के साथ भेदभाव करती है, क्योंकि वे महंगे कोचिंग सेंटरों तक नहीं पहुंच पाते हैं।