जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने उमर खालिद की किताब 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' पर होने वाली चर्चा के लिए ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी है। इसके बावजूद, JNUSU ने कार्यक्रम को खुले में आयोजित करने का फैसला किया है।
मुख्य बातें
- JNU प्रशासन ने SSS-I ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द की।
- कारण: विश्वविद्यालय के अनुसार, वेन्यू रिक्वेस्ट फॉर्म में कार्यक्रम की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
- JNUSU ने इस फैसले को 'अलोकतांत्रिक' बताते हुए कार्यक्रम को SSS-II भवन के बाहर आयोजित करने का निर्णय लिया है।
- कार्यक्रम में प्रो. प्रभु महापात्र और हर्ष मंदर जैसे दिग्गज वक्ता शामिल होंगे।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर अकादमिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच टकराव देखने को मिल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 10 अगस्त को होने वाली उमर खालिद की पुस्तक 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' (Fractured Communities) पर आधारित चर्चा के लिए SSS-I ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि ऑडिटोरियम बुकिंग के लिए जमा किए गए फॉर्म में प्रस्तावित कार्यक्रम का पूरा विवरण साझा नहीं किया गया था। संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा जारी इस निर्णय को स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) के डीन की मंजूरी भी प्राप्त है। हालांकि, छात्र संघ (JNUSU) ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल एक ऑडिटोरियम बुकिंग का नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक सेंसरशिप के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक है। JNUSU ने प्रशासन पर 'दोहरा रवैया' अपनाने का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि कुछ कार्यक्रमों को अनुमति दी जाती है, जबकि आदिवासी अधिकारों और सामाजिक संघर्षों से जुड़े मुद्दों को दबाने का प्रयास किया जाता है।
'अकादमिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक बहस किसी भी विश्वविद्यालय की आत्मा होती है, जिसे प्रशासनिक तकनीकी कारणों से रोका नहीं जा सकता।'
बुकिंग रद्द होने के बावजूद, छात्र संघ ने हार नहीं मानी है। उन्होंने निर्णय लिया है कि कार्यक्रम को SSS-II भवन के बाहर खुले में आयोजित किया जाएगा। यह चर्चा आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रो. प्रभु महापात्र, प्रो. उमा चक्रवर्ती और हर्ष मंदर जैसे प्रमुख विद्वान वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
JNU लंबे समय से भारत के सबसे राजनीतिक रूप से सक्रिय विश्वविद्यालयों में से एक रहा है। यहाँ अक्सर सामाजिक न्याय, नागरिक स्वतंत्रता और हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों पर गहन बहस होती रही है। उमर खालिद का मामला और उनकी पुस्तक पर चर्चा का प्रयास प्रशासन और छात्रों के बीच के पुराने संघर्ष को फिर से जीवित कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. प्रशासन ने बुकिंग क्यों रद्द की?
प्रशासन के अनुसार, वेन्यू रिक्वेस्ट फॉर्म में कार्यक्रम की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
2. कार्यक्रम अब कहाँ आयोजित होगा?
JNUSU ने निर्णय लिया है कि चर्चा SSS-II भवन के बाहर खुले में होगी।