1976 के अभिलेखागार से पता चलता है कि IIT अभ्यर्थी व्यक्तिगत योग्यता के बजाय नौकरी के अवसरों को प्राथमिकता देते थे। प्रो. ए.के. बसु ने जुनून के बजाय 'लोकप्रिय' शाखाओं को चुनने की प्रणालीगत प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला है।

मुख्य बिंदु

  • 1976 में छात्रों ने शैक्षणिक योग्यता के बजाय नौकरी की संभावनाओं को प्राथमिकता दी।
  • इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और केमिकल इंजीनियरिंग सबसे लोकप्रिय पाठ्यक्रम थे।
  • JEE के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में काफी वृद्धि हुई, कुल 4,531 उम्मीदवारों ने आवेदन किया।

अगस्त 1976 की बात करें, जब भारतीय तकनीकी शिक्षा का परिदृश्य विकसित हो रहा था। तत्कालीन प्रवेश अध्यक्ष प्रो. एफ.के. बसु के अनुसार, पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों के बीच एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखी गई। विशेषज्ञता का चयन छात्रों की स्वाभाविक रुचि या योग्यता से प्रेरित नहीं था, बल्कि भविष्य में मिलने वाले रोजगार के अवसरों के अनुमान पर आधारित था।

प्रो. बसु ने उल्लेख किया कि अधिकांश मामलों में यह आकलन तथ्यों पर आधारित नहीं था। 'अलोकप्रिय' माने जाने वाले पाठ्यक्रमों सहित सभी शाखाओं में शिक्षण और अनुसंधान के पर्याप्त अवसर उपलब्ध थे, फिर भी छात्रों की मानसिकता वही रही। सबसे लोकप्रिय तीन विकल्प इलेक्ट्रिकल (इलेक्ट्रॉनिक्स), मैकेनिकल और केमिकल इंजीनियरिंग रहे, जो पिछले वर्ष के रुझानों के समान थे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia का विश्लेषण दर्शाता है कि यह ऐतिहासिक डेटा भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक आवर्ती विषय को दर्शाता है: 'प्लेसमेंट-प्रथम' मानसिकता। पांच दशक पहले भी, एक डिग्री की प्रतिष्ठा उसकी बौद्धिक क्षमता के बजाय तत्काल रोजगार क्षमता से मापी जाती थी। यह बताता है कि वर्तमान में 'CS/IT' शाखाओं का जुनून कोई नई घटना नहीं है, बल्कि एक लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक पैटर्न का हिस्सा है।

"कुलीन संस्थानों में शैक्षणिक जुनून और करियर चयन के बीच का यह अंतर वास्तविक नवाचार और अनुसंधान-आधारित विकास में बाधा उत्पन्न करता है।"

उस दौर में प्रतिस्पर्धा तीव्र हो रही थी। 1976 में, संयुक्त प्रवेश परीक्षा के लिए कुल 4,531 उम्मीदवारों ने आवेदन किया, जो पिछले वर्ष के 3,936 आवेदकों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि थी। हालांकि, मेरिट लिस्ट बेहद सीमित थी, जिसमें केवल 282 उम्मीदवार ही शीर्ष स्थानों के लिए योग्य पाए गए।

मानदंड 1975 के आंकड़े 1976 के आंकड़े
कुल आवेदक 3,936 4,531
मेरिट लिस्ट क्वालीफायर 216 282
क्या आप जानते हैं?: 1976 में भारत में केवल पांच IIT थे, जबकि आज 23 से अधिक संस्थान हैं, जिससे उन कुछ सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा अविश्वसनीय रूप से कठिन थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 1976 में IIT में कौन से पाठ्यक्रम सबसे लोकप्रिय थे?
उत्तर: इलेक्ट्रिकल (इलेक्ट्रॉनिक्स), मैकेनिकल और केमिकल इंजीनियरिंग शीर्ष तीन विकल्प थे।

प्रश्न 2: छात्रों ने 'अलोकप्रिय' पाठ्यक्रमों से परहेज क्यों किया?
उत्तर: छात्र अपनी वास्तविक योग्यता या पाठ्यक्रम की शैक्षणिक गुणवत्ता के बजाय कथित नौकरी के अवसरों से प्रेरित थे।