एक आरटीआई (RTI) के जवाब से खुलासा हुआ है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) NEET-UG परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन करने वाले कर्मचारियों की सीधे जांच या भर्ती नहीं करती है। बिहार पुलिस द्वारा एक बड़े डमी-कैंडिडेट रैकेट में 18 बायोमेट्रिक कर्मचारियों सहित 30 लोगों को गिरफ्तार किए जाने के बाद यह गंभीर सुरक्षा चूक सामने आई है।
मुख्य बिंदु
- बिहार पुलिस ने लखीसराय में एक बड़े नीट-यूजी (NEET-UG) डमी-कैंडिडेट रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 30 लोगों को गिरफ्तार किया है।
- गिरफ्तार आरोपियों में 18 बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मचारी शामिल हैं, जिन पर फर्जी उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठाने का आरोप है।
- आरटीआई (RTI) के जवाब में NTA ने खुलासा किया कि वह बायोमेट्रिक वेंडर्स की सीधे जांच या भर्ती नहीं करता है, बल्कि यह काम EdCIL को आउटसोर्स किया गया था।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। बिहार पुलिस ने हाल ही में लखीसराय जिले के तीन परीक्षा केंद्रों—केआरके कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय और हसनपुर हाई स्कूल—में चल रहे एक बड़े 'डमी कैंडिडेट' रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 18 लोग वही बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मचारी हैं, जिन्हें वास्तविक उम्मीदवारों की पहचान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से सवाल पूछे गए, तो एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया। NTA ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उसका परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन करने वाले जमीनी स्तर के कर्मचारियों या उन्हें नियुक्त करने वाले थर्ड-पार्टी वेंडर्स से कोई सीधा संबंध नहीं है।
आउटसोर्सिंग का मकड़जाल और सुरक्षा में सेंध
NTA द्वारा दिए गए आरटीआई जवाब के अनुसार, एजेंसी ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया के लिए सरकारी उपक्रम EdCIL (India) Limited के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। EdCIL ने आगे निजी वेंडर्स को यह काम सौंप दिया। जब NTA से पूछा गया कि इन एजेंसियों को काम सौंपने से पहले क्या सावधानी बरती गई थी, तो NTA का सीधा जवाब था कि चूंकि समझौता EdCIL के साथ है, इसलिए वह सीधे तौर पर किसी भी तीसरे पक्ष के वेंडर की पृष्ठभूमि की जांच या सत्यापन नहीं करता है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस रैकेट के मास्टरमाइंड मुजफ्फरपुर के एमबीबीएस छात्र अर्पित सिंह और वैशाली के मयंक कश्यप थे। इन लोगों ने बायोमेट्रिक टीम के साथ मिलकर फर्जी आधार कार्ड और जाली दस्तावेजों के सहारे डमी उम्मीदवारों को परीक्षा हॉल में प्रवेश दिलाया। गिरफ्तार किए गए लोगों में 9 डमी उम्मीदवार शामिल हैं जो पहले से ही मेडिकल और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं।
| संस्था (Agency) | घोषित जिम्मेदारी (Declared Responsibility) | वास्तविक स्थिति (Actual Status) |
|---|---|---|
| NTA | परीक्षा का आयोजन और समग्र सुरक्षा | बायोमेट्रिक वेंडर्स के चयन और जांच में कोई सीधी भूमिका नहीं |
| EdCIL | बायोमेट्रिक वेंडर्स की नियुक्ति और निगरानी | निजी एजेंसियों को काम आउटसोर्स किया, जमीनी निगरानी में कमी |
| थर्ड-पार्टी वेंडर | परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन करना | कर्मचारी खुद डमी-कैंडिडेट रैकेट के साथ संलिप्त पाए गए |
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की सबसे संवेदनशील परीक्षाओं में से एक में सुरक्षा का इस तरह से आउटसोर्सिंग किया जाना बेहद चिंताजनक है। जब परीक्षा आयोजित करने वाली मुख्य संस्था (NTA) ही अंतिम छोर पर खड़े सुरक्षाकर्मियों की विश्वसनीयता से अनजान हो, तो परीक्षा की शुचिता पूरी तरह से खतरे में पड़ जाती है। यह मामला केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि देश के लाखों ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
"जब तक मुख्य परीक्षा नियामक एजेंसियां अंतिम स्तर के सुरक्षा कर्मियों के सत्यापन की सीधी जिम्मेदारी नहीं लेंगी, तब तक तकनीक का उपयोग केवल एक दिखावा बनकर रह जाएगा और सॉल्वर गैंग इसका फायदा उठाते रहेंगे।"
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: नीट और विवादों का पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब नीट परीक्षा विवादों में घिरी है। इससे पहले भी प्रश्नपत्र लीक होने, ग्रेस मार्क्स विवाद और बड़े पैमाने पर नकल के आरोपों के कारण सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा था। साल 2024 और 2026 की परीक्षाओं में विसंगतियों के बाद री-टेस्ट का आयोजन किया गया था, जिसे पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने का दावा किया गया था। लेकिन लखीसराय की घटना ने साबित कर दिया है कि सुरक्षा के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर सेंधमारी जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: बिहार के लखीसराय में नीट परीक्षा को लेकर क्या घोटाला सामने आया है?
उत्तर: लखीसराय में पुलिस ने एक डमी-कैंडिडेट रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें वास्तविक छात्रों की जगह परीक्षा देने वाले 9 डमी उम्मीदवारों और सुरक्षा जांच करने वाले 18 बायोमेट्रिक कर्मचारियों सहित 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रश्न 2: बायोमेट्रिक कर्मचारियों की भर्ती के संबंध में NTA का क्या रुख है?
उत्तर: NTA ने आरटीआई में स्पष्ट किया है कि वह इन कर्मचारियों की सीधे भर्ती या जांच नहीं करता है। यह काम सरकारी कंपनी EdCIL को आउटसोर्स किया गया था, जिसने आगे निजी वेंडर्स को नियुक्त किया था।