एआईएसए राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली, झारखंड और पश्चिम बंगाल में चल रहे छात्र विरोधों को एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदला, जबकि उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने की मांग की। वह राजनीतिक उत्तरदायित्व और परीक्षा प्रणाली के विकेंद्रीकरण की आवश्यकता पर जोर देती हैं।
मुख्य बिंदु
- एनटीए को समाप्त करने की एआईएसए की मांग
- केन्द्रिय परीक्षा प्रणाली की आलोचना
- जन‑Z राइज़िंग अभियान के राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
एआईएसए (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) ने मंगलवार को कोलकाता प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वर्तमान छात्र विरोधों को एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन में बदला जाना चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को रद्द करने और NEP 2020 को उलटने की मांग की।
बोरा ने झारखंड में सार्वजनिक सेवा आयोग (JPSC) और स्टाफ चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में irregularities के खिलाफ हुए विरोध को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि ये सभी आंदोलन एक ही समस्या – परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण – के लक्षण हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the decentralisation of examinations could reshape India’s education landscape, reducing regional disparities and empowering state governments.
"केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली एक प्रणालीगत समस्या है, जिसे केवल कड़ी सजा से नहीं सुलझाया जा सकता," शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. अंजलि वर्मा ने कहा।
बोरा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में जंतर mantar विरोध में भाग लिया था, जहाँ उन्होंने तब के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पदत्याग की मांग की थी। उन्होंने कहा, "जब प्रतिनिधि जनता के प्रति उत्तरदायी नहीं होते, तो लोकतंत्र को बचाने के लिए जन आंदोलन आवश्यक हो जाता है।"
टामिलनाडु की परीक्षा प्रणाली के विकेंद्रीकरण की मांग को भी एआईएसए ने समर्थन किया है, जहाँ राज्य ने नेशनल NEET मॉडल के विरोध में एक लंबा इतिहास बनाया है। बोरा ने कहा कि निजी एजेंसियों को परीक्षा‑संबंधी कार्यों का आउटसोर्सिंग छात्रों के भविष्य को जोखिम में डालता है।
Frequently Asked Questions
- एनटीए को रद्द करने से छात्रों को क्या लाभ होगा? यह राज्य‑स्तरीय परीक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करेगा और छात्रों को स्थानीय शैक्षणिक माहौल के अनुसार अधिक अवसर देगा।
- एआईएसए का "जन‑Z राइज़िंग" अभियान कब शुरू हुआ? यह अभियान इस महीने की शुरुआत में लॉन्च किया गया था, और अब तक यह कई राज्यों में छात्र समूहों से जुड़ चुका है।