ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन के आंकड़े दिखाते हैं कि 2025 में विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या लगातार घट रही है, जबकि आईआईटी और आईआईएम जैसी प्रमुख संस्थाओं ने विदेश में नए कैंपस खोले हैं। यह दोहरी प्रवृत्ति भारत की शैक्षिक रणनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाती है।

Key Takeaways

  • विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2025 में घटी
  • इंडियन संस्थानों ने विदेश में कैंपस स्थापित किए
  • कनाडा, यूएस और यूके प्रमुख गंतव्य बने रहे

विदेश में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की गिरावट

ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन (BoI) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 6,19,264 भारतीय छात्रों ने अध्ययन या शिक्षा को उद्देश्य बताकर विदेश यात्रा की, जो 2024 के 7,60,060 और 2023 के 8,94,758 से क्रमशः 15% और 18.5% कमी दर्शाता है।

2021 में 4,45,580 से 2023 में 8,94,758 तक तेज़ वृद्धि के बाद, अब प्रवाह उलटा है। इस गिरावट को कड़ी इमीग्रेशन नियमों और बढ़ते खर्चों से जोड़ा जा रहा है।

भारतीय संस्थानों का विदेश में विस्तार

आईआईटी मद्रास, दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद ने क्रमशः ज़ांज़ीबार, अबू धाबी और दुबई में कैंपस स्थापित किए। 2025‑26 शैक्षणिक वर्ष में आईआईएम दुबई ने 35 छात्रों के साथ एमबीए शुरू किया, जबकि आईआईटी मद्रास के ज़ांज़ीबार कैंपस में 100 से अधिक छात्र बीएस कार्यक्रम में दाखिला ले रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the simultaneous decline in outbound student mobility and rise of Indian campuses abroad signals a strategic shift toward “reverse internationalization,” reshaping India's higher‑education landscape.

“विदेश में पढ़ाई का विकल्प अब केवल छात्र नहीं, बल्कि संस्थानों की रणनीति भी बन गया है।” – प्रो. अंजली शर्मा, शैक्षणिक नीति विशेषज्ञ
Did You Know?: 2025 में कुल 18,82,318 भारतीय छात्र विदेश में पढ़ रहे थे, जिसमें 12,54,013 विश्वविद्यालय स्तर पर थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या भारत में शिक्षा की लागत में गिरावट से प्रवाह बदल सकता है?

उत्तर: यदि सरकारी स्कीम और वित्तीय सहायता मजबूत हुई तो संभावित रूप से छात्र विदेश यात्रा में वृद्धि हो सकती है।

प्रश्न 2: कौन से देशों में भारतीय संस्थानों के कैंपस सबसे अधिक सफल हैं?

उत्तर: दुबई और अबू धाबी ने शुरुआती चरण में उच्च दाखिला संख्या दर्ज की है, जिससे मध्य पूर्व में विस्तार की संभावनाएँ उजागर होती हैं।