एक संसदीय समिति ने बताया कि देश में लगभग 73 % छात्र उच्च माध्यमिक पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं। यह गिरावट प्राथमिक स्तर से द्वितीय एवं उच्च माध्यमिक स्तर तक स्कूलों की संख्या में तीव्र कमी से जुड़ी है।
मुख्य बिंदु
- लगभग 73% छात्र उच्च माध्यमिक समाप्त होने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं।
- द्वितीय और उच्च माध्यमिक स्तर पर स्कूलों की संख्या बहुत कम है।
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
पार्लियामेंटरी पैनल की चेतावनी
18 वीं लोकसभा की समिति ने अपनी 10वीं रिपोर्ट में बताया कि शिक्षा के स्तर बढ़ने के साथ‑साथ स्कूलों और छात्रों की संख्या में ‘तिव्र गिरावट’ देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 10,92,671 कुल सरकारी एवं अनुदानित स्कूलों में से केवल 90,866 ही उच्च माध्यमिक स्तर पर हैं।
स्कूलों और छात्रों की संख्या में असंतुलन
यूडीआईएसई 2024‑25 डेटा के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर 9,11,032 स्कूल हैं, जबकि द्वितीय स्तर पर 1,61,808 और उच्च माध्यमिक स्तर पर मात्र 90,866 स्कूल हैं। इसी के साथ छात्र संख्या भी घटती है: प्राथमिक में 6,18,45,033, द्वितीय में 2,36,68,220, और उच्च माध्यमिक में केवल 1,64,17,949।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the declining availability of secondary and higher secondary schools directly fuels the massive dropout rate, jeopardizing India’s human capital and long‑term economic growth.
“यदि द्वितीय एवं उच्च माध्यमिक संस्थानों की संख्या नहीं बढ़ी तो यह प्रवृत्ति और तेज़ी से आगे बढ़ेगी,” Dr. अजय सिंह, शैक्षिक नीति विशेषज्ञ ने कहा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो दशकों में भारत ने प्राथमिक शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति की, लेकिन द्वितीय और उच्च माध्यमिक स्तर पर निवेश में असमानता बनी रही। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने ‘शून्य अस्वीकृति’ और समावेशी शिक्षा पर ज़ोर दिया, फिर भी आधारभूत संरचनाओं में अंतर बना हुआ है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या द्वितीय और उच्च माध्यमिक स्कूलों की संख्या बढ़ाने से ड्रॉप‑आउट कम होगा?
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि निकटता और सुविधाजनक बुनियादी ढांचा छात्र प्रतिधारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 2: दिव्यांग छात्रों के लिए वर्तमान में कौन‑सी सरकारी पहलें चल रही हैं?
उत्तर: समग्र शिक्षा योजना के तहत रैंप, हाथrail और विशेष शौचालयों के निर्माण के लिए निधि आवंटित की गई है, परन्तु उपयोग दर अभी भी बहुत कम है।