जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए इसे एक 'दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक अभियान' करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी रही हैं।
मुख्य बातें
- कुलपति शांतिश्री पंडित ने भर्ती संबंधी आरोपों को 'झूठा प्रचार' बताया।
- JNUTA और JNUSU द्वारा इस्तीफे की मांग के बाद विवाद गहराया।
- प्रशासन का दावा है कि नियुक्तियों में SC/ST और OBC वर्गों को प्राथमिकता दी गई है।
- कुलपति ने इसे विश्वविद्यालय और केंद्र सरकार को बदनाम करने की साजिश कहा।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने रविवार को भर्ती में कथित अनियमितताओं के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन आरोपों को जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) और जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) द्वारा चलाया जा रहा एक 'दुर्भावनापूर्ण अभियान' करार दिया है।
कुलपति ने मीडिया रिपोर्टों का खंडन करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के पिछले साढ़े चार वर्षों में नियुक्तियां पूरी तरह से पारदर्शी और रिकॉर्ड के आधार पर की गई हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि SC/ST और OBC श्रेणियों के तहत नियुक्तियां निष्पक्ष रूप से की गई हैं और इन आरोपों के पीछे कोई ठोस सबूत नहीं है।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद तब शुरू हुआ जब गुरुवार को JNUSU और JNUTA ने कुलपति से इस्तीफे की मांग की। यूनियनों का आरोप है कि नियुक्तियों, पदोन्नति और आवास आवंटन में योग्यता के बजाय व्यक्तिगत या राजनीतिक विचारधारा को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीन और अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए स्थापित रोटेशन प्रणाली का उल्लंघन किया गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि गहरे राजनीतिक रंग का है। विश्वविद्यालय के भीतर वामपंथी और केंद्र समर्थक विचारधाराओं के बीच का संघर्ष इस मामले में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
'यह विश्वविद्यालय और भारत सरकार को शर्मिंदा करने के लिए चलाया जा रहा एक राजनीतिक अभियान है।'
जेएनयू प्रशासन ने एक बयान में कहा कि यह हमला उन समूहों द्वारा किया जा रहा है जो दिल्ली उच्च न्यायालय में 'अर्बन नक्सल' से जुड़े मामलों में मिली हार से असंतुष्ट हैं। प्रशासन ने दावा किया कि फरवरी 2022 से अब तक 400 से अधिक साक्षात्कार आयोजित किए गए और 200 से अधिक पद भरे गए, जिनमें से लगभग 70% आरक्षित श्रेणियों से हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कुलपति ने किन संगठनों पर आरोप लगाया है?
उत्तर: कुलपति ने JNUSU और JNUTA पर दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाने का आरोप लगाया है।
प्रश्न 2: प्रशासन के अनुसार नियुक्तियों का क्या रिकॉर्ड है?
उत्तर: प्रशासन का दावा है कि 200 से अधिक नियुक्तियों में से 70% आरक्षित श्रेणियों से हैं।