नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने त्रुटियों के कारण अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के UGC-NET पेपर रद्द कर दिए हैं। इस फैसले से पीएचडी उम्मीदवारों और जेआरएफ (JRF) आवेदकों में भारी तनाव और अनिश्चितता का माहौल है।
- अंग्रेजी, समाजशास्त्र और कॉमर्स की पुन: परीक्षा 9 और 10 सितंबर को होगी।
- जून के पेपर में 'तथ्यात्मक, टाइपोग्राफिकल और अनुवाद त्रुटियों' के कारण रद्दीकरण।
- जेएनयू (JNU) और डीयू (DU) जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में देरी।
देश की प्रमुख परीक्षण एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जून 2026 सत्र के लिए अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के विषयों के पेपर रद्द कर दिए गए हैं और अब इनकी पुन: परीक्षा आयोजित की जाएगी। एक समीक्षा समिति ने पाया कि मूल प्रश्नपत्रों में गंभीर तथ्यात्मक और अनुवाद संबंधी गलतियां थीं।
यह पुन: परीक्षा 9 और 10 सितंबर को निर्धारित की गई है। हजारों छात्रों के लिए यह केवल एक तारीख का बदलाव नहीं है, बल्कि उनके करियर और शैक्षणिक वर्ष पर संकट है। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा के तुरंत बाद इन गलतियों के बारे में सूचित किया था, लेकिन NTA ने 45 दिनों के बाद इस पर संज्ञान लिया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि NTA की विश्वसनीयता अब दांव पर है। NEET पेपर लीक विवाद के बाद UGC-NET में इस तरह की लापरवाही यह संकेत देती है कि पेपर सेट करने और ऑडिट करने की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं। इसका सीधा असर भारत के शीर्ष संस्थानों के पीएचडी प्रवेश चक्र पर पड़ रहा है।
दयिता सामंत जैसी छात्राओं ने बताया कि अंग्रेजी के पेपर में दिसंबर 2024 के पेपर से लगभग 70 प्रश्न शब्द-दर-शब्द दोहराए गए थे। यह न केवल परीक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है, बल्कि उन छात्रों के साथ अन्याय है जो कड़ी मेहनत से तैयारी करते हैं।
NTA की बार-बार होने वाली गलतियां उम्मीदवारों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं, जिससे एक योग्यता-आधारित परीक्षा अब केवल किस्मत और लॉजिस्टिक्स का खेल बनकर रह गई है।
इस व्यवधान का असर उन छात्रों पर भी पड़ा है जिन्होंने पहले ही जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) क्लियर कर ली है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) जैसे संस्थान आमतौर पर जून चक्र के परिणामों का इंतजार करते हैं। अब परिणाम अक्टूबर तक आने की संभावना है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया में देरी होगी और छात्रों का एक पूरा साल बर्बाद हो सकता है।
इसके अलावा, दूर-दराज के राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए यात्रा और ठहरने की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई छात्र, जो पहले से ही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, इस अनिश्चितता के कारण मानसिक तनाव महसूस कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: किन विषयों की पुन: परीक्षा होगी?
जून 2026 सत्र के लिए केवल अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की पुन: परीक्षा होगी।
प्रश्न 2: इससे पीएचडी प्रवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
चूंकि कई केंद्रीय विश्वविद्यालय जून के परिणामों के बाद प्रवेश शुरू करते हैं, इसलिए परिणामों में देरी से पूरी प्रवेश प्रक्रिया आगे खिसक जाएगी।