विशाखापट्टनम स्थित GITAM स्कूल ऑफ कोर इंजीनियरिंग ने बायोमेडिकल प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक 'श्वान प्रयोगशाला' की शुरुआत की है। यह केंद्र छात्रों को चिकित्सा उपकरणों के डिजाइन और क्लिनिकल वर्कफ्लो में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगा।

  • GITAM विशाखापट्टनम में अत्याधुनिक श्वान प्रयोगशाला (Schwan Laboratory) की स्थापना।
  • ECG, EEG, EMG और गेट एनालिसिस जैसे उन्नत बायोमेडिकल उपकरणों की उपलब्धता।
  • बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए उद्योग-केंद्रित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर।

विशाखापट्टनम स्थित GITAM स्कूल ऑफ कोर इंजीनियरिंग (GSCE) ने चिकित्सा विज्ञान और इंजीनियरिंग के संगम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को संस्थान ने बायोमेडिकल प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए समर्पित श्वान प्रयोगशाला का औपचारिक उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व GSCE के निदेशक पी. भरणी चंद्र कुमार ने किया, जबकि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख आई. सरत बाबू, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।

यह प्रयोगशाला केवल एक शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि एक उन्नत अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित की गई है। यहाँ छात्रों को फिजियोलॉजिकल सिग्नल अधिग्रहण, श्वसन मूल्यांकन और बायोमैकेनिकल मूल्यांकन के लिए अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। प्रयोगशाला में स्थापित BIOPAC सिस्टम के माध्यम से ECG, EEG और EMG विश्लेषण किया जाएगा, जो मानव शरीर की विद्युत गतिविधियों को समझने के लिए अनिवार्य हैं।

उपकरण और तकनीकी क्षमताएं

इस केंद्र की तकनीकी क्षमताएं इसे क्षेत्र की अग्रणी प्रयोगशालाओं में खड़ा करती हैं। यहाँ उपलब्ध उपकरणों की सूची इस प्रकार है:

उपकरण श्रेणीविशिष्ट तकनीक/सिस्टमउपयोग/उद्देश्य
सिग्नल एनालिसिसBIOPAC & Noraxon EMGECG, EEG और गेट एनालिसिस
श्वसन सहायताNon-invasive Ventilators & Spirometersपल्मोनरी फंक्शन टेस्ट और वेंटिलेशन
सर्जिकल ट्रेनिंगSurgical Diathermy Unitsसर्जिकल प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण
क्रिटिकल केयरDefibrillator Simulators & Syringe Pumpsआपातकालीन चिकित्सा सिमुलेशन

यह सुविधा विशेष रूप से GITAM के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग बी.टेक कार्यक्रम को सशक्त बनाएगी। यह पाठ्यक्रम जीव विज्ञान, चिकित्सा और इंजीनियरिंग का एक एकीकृत मिश्रण है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए कुशल इंजीनियर तैयार करना है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों के निर्माण की मांग बढ़ी है। ऐसी प्रयोगशालाएं छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक क्लिनिकल वर्कफ्लो और मेडिकल-डिवाइस डिजाइन से जोड़ती हैं, जिससे 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूती मिलती है।

"बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में व्यावहारिक अनुभव और अत्याधुनिक सिमुलेशन ट्रेनिंग ही भविष्य के चिकित्सा नवाचारों की नींव रखती है।"

संस्थान ने स्पष्ट किया है कि वह चिकित्सा और औद्योगिक संस्थानों के साथ रणनीतिक सहयोग करेगा। इससे छात्रों को मेडिकल उपकरणों के परीक्षण, डिजाइन और वास्तविक अस्पताल परिवेश में काम करने का अवसर मिलेगा, जो उनके करियर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

क्या आप जानते हैं?: बायोमेडिकल इंजीनियरिंग वह क्षेत्र है जिसने पेसमेकर और एमआरआई (MRI) जैसी जीवनरक्षक तकनीकों को संभव बनाया है, जो इंजीनियरिंग और जीव विज्ञान का सटीक मेल है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: श्वान प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को उन्नत उपकरणों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर प्रदान करना है।

प्रश्न 2: इस लैब में कौन से प्रमुख उपकरण उपलब्ध हैं?
उत्तर: लैब में BIOPAC सिस्टम (ECG/EEG के लिए), Noraxon EMG, नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर और डिफिब्रिलेटर सिमुलेटर जैसे उपकरण शामिल हैं।