AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने विजयवाड़ा में छात्रों को संबोधित करते हुए शिक्षा के निजीकरण और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने NEP-2020 को रद्द करने और सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने की मांग की है।

  • नेहा बोरा ने शिक्षा के निजीकरण और कॉर्पोरेटाइजेशन के खिलाफ आवाज उठाई।
  • NEP-2020 को तुरंत रद्द करने की मांग की गई।
  • NTA की विफलताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा।
  • छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन की कड़ी आलोचना की।

विजयवाड़ा में आयोजित 'Gen-Z Questions' कार्यक्रम के दौरान, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने देश में व्याप्त विभाजनकारी राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में घृणा फैलाना आसान हो गया है, जबकि एकजुटता और प्रेम प्रदर्शित करना कठिन होता जा रहा है।

बोरा ने विशेष रूप से भाजपा (BJP) और आरएसएस (RSS) की 'कॉर्पोरेट समर्थक और विभाजनकारी राजनीति' की आलोचना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम जनता, जो सम्मानजनक जीवन और उचित मजदूरी के लिए संघर्ष कर रही है, उसकी एकता ही इन ताकतों का सबसे सशक्त जवाब होगी।

शिक्षा का बढ़ता निजीकरण और संकट

नेहा बोरा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 को शिक्षा के अधिकार को एक वस्तु (commodity) में बदलने वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति सार्वजनिक संस्थानों की कीमत पर निजी और कॉर्पोरेट शैक्षिक संस्थानों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार को उच्च शिक्षा के लिए सार्वजनिक वित्तपोषण में भारी वृद्धि करनी चाहिए ताकि सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके।

शिक्षा को लाभ का साधन बनाना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

उन्होंने आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी और विपक्षी दोनों पार्टियों की आलोचना की क्योंकि उन्होंने बिना सवाल पूछे केंद्र की शिक्षा नीतियों का समर्थन किया। बोरा के अनुसार, स्कूलों का बंद होना और सरकारी कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है।

NTA की विफलताएं और बेरोजगारी

BozokMedia analysis shows कि छात्रों के बीच बढ़ता असंतोष केवल नीतिगत बदलावों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक विफलताओं से भी जुड़ा है। नेहा बोरा ने NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की निरंतर विफलताओं, प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं के रद्द होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि NTA को समाप्त कर एक पारदर्शी और जवाबदेह राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली स्थापित की जाए।

इसके अलावा, उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी और रोजगार के लिए प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिसिया कार्रवाई की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करना लोकतंत्र पर हमला है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में छात्र राजनीति हमेशा से सामाजिक न्याय और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की लड़ाई का केंद्र रही है। AISA जैसे संगठन दशकों से सार्वजनिक शिक्षा की रक्षा और शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, विशेष रूप से उदारीकरण के दौर में जब निजीकरण की लहर तेज हुई है।

Frequently Asked Questions

1. नेहा बोरा ने NEP-2020 का विरोध क्यों किया?
उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति शिक्षा का निजीकरण करती है और इसे एक मौलिक अधिकार के बजाय एक व्यापारिक वस्तु बना देती है।

2. NTA की विफलताओं से छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
पेपर लीक और परीक्षाओं के बार-बार रद्द होने से लाखों छात्रों का कीमती समय और करियर दांव पर लग गया है।

Did You Know?: भारत में छात्र आंदोलन ऐतिहासिक रूप से बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलावों के उत्प्रेरक रहे हैं।