बेंगलुरु के स्कूल बच्चों को स्वस्थ आहार देने के लिए 'शुगर बोर्ड' और 'ऑयल बोर्ड' जैसे कड़े कदम उठा रहे हैं, लेकिन स्कूल परिसर के बाहर जंक फूड की आसान उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

  • बेंगलुरु के कई स्कूल अब सीबीएसई मानदंडों के अनुसार 'शुगर' और 'ऑयल' बोर्ड का उपयोग कर रहे हैं।
  • स्कूलों के भीतर मैदा, चीनी और तले हुए भोजन पर कड़ा प्रतिबंध है।
  • परिसर के बाहर जंक फूड की उपलब्धता और बच्चों द्वारा बाहर से खाना खरीदना एक गंभीर समस्या है।
  • इनवेंटर एकेडमी जैसे स्कूल छात्रों द्वारा विकसित मोबाइल ऐप का उपयोग कर रहे हैं।

बेंगलुरु के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में एक नई जंग छिड़ी हुई है—यह जंग बच्चों की थाली और उनके स्वास्थ्य के बीच है। जहाँ एक ओर स्कूल प्रशासन बच्चों को पौष्टिक आहार की आदत डालने के लिए कड़े नियम लागू कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्कूल की दहलीज के बाहर स्थित खाद्य स्टॉल और बेकरी एक बड़ी बाधा बनकर खड़े हैं।

स्कूलों की अभिनव पहल

शहर के कई सीबीएसई और अंतर्राष्ट्रीय स्कूल अब केवल उपदेश नहीं दे रहे, बल्कि दृश्य माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। रायन इंटरनेशनल एकेडमी जैसे स्कूलों में 'शुगर बोर्ड' लगाए गए हैं, जो बच्चों को यह दिखाते हैं कि विभिन्न शीतल पेय और प्रोसेस्ड फूड में वास्तव में कितनी चीनी होती है। यह दृश्य शिक्षा बच्चों को उनके खान-पान के प्रति जागरूक बनाने में मदद कर रही है।

संदीपनी एकेडमी फॉर एक्सीलेंस की निदेशक, लथा एम. ने बताया कि उनका संस्थान पिछले 12 वर्षों से मैदा, चीनी और अत्यधिक तले हुए भोजन पर प्रतिबंध लगाए हुए है। यहाँ तक कि जन्मदिन पर केक और चॉकलेट लाने पर भी रोक है। स्कूल अभिभावकों को सलाह देते हैं कि वे बच्चों के टिफिन में फल और मेवे जैसे स्वस्थ विकल्प भेजें।

बच्चे वही दोहराते हैं जो वे देखते हैं; यदि माता-पिता स्वस्थ विकल्प चुनेंगे, तो बच्चे भी स्वस्थ बनेंगे।

बोजोकमीडिया विश्लेषण: एक बड़ी चुनौती

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि केवल स्कूल के भीतर नियमों को लागू करना पर्याप्त नहीं है। कर्नाटक सरकार ने स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड बेचने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जो एक स्वागत योग्य कदम है। हालांकि, समस्या तब आती है जब बच्चों के पास बाहर से स्नैक्स खरीदने के लिए नकदी होती है। स्कूल के भीतर अनुशासन है, लेकिन स्कूल के बाहर का वातावरण बच्चों को प्रलोभन देता है।

तकनीक का उपयोग: एक नया मोड़

इनवेंटर एकेडमी ने इस समस्या से निपटने के लिए तकनीक का सहारा लिया है। यहाँ के कक्षा 11 के छात्रों ने एक मोबाइल ऐप विकसित किया है। यह ऐप किसी भी प्रोसेस्ड फूड पैकेट को स्कैन कर सकता है और उसमें मौजूद वसा, चीनी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा की सटीक जानकारी दे सकता है। यह छात्रों को स्वयं निर्णय लेने की शक्ति देता है।

Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि अत्यधिक चीनी का सेवन बच्चों में एकाग्रता की कमी और ऊर्जा के स्तर में अचानक उतार-चढ़ाव का कारण बन सकता है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बेंगलुरु के स्कूल जंक फूड को रोकने के लिए क्या कर रहे हैं?
स्कूल 'शुगर बोर्ड', 'ऑयल बोर्ड' और सख्त टिफिन नीतियों का उपयोग कर रहे हैं।

2. क्या सरकार ने इस संबंध में कोई कदम उठाया है?
हाँ, राज्य सरकार ने स्कूल परिसरों के 50 मीटर के भीतर जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।