नवीनतम UDISE+ आंकड़ों के अनुसार, भारतीय स्कूलों में डिजिटल बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ है, लेकिन लगभग एक-तिहाई संस्थान अभी भी ऑफलाइन हैं। कंप्यूटरों की उपलब्धता तेजी से बढ़ी है, लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- 2025-26 में स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़कर 67.4% हो गई, जो पहले 63.5% थी।
- कंप्यूटर की उपलब्धता में अधिक वृद्धि हुई, जो अब 69.9% स्कूलों में है।
- देश के लगभग 32.6% स्कूलों में अभी भी इंटरनेट की सुविधा नहीं है।
- पेयजल (99.5%) और बिजली (95%) जैसी बुनियादी सुविधाएं लगभग सभी स्कूलों में उपलब्ध हैं।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी Unified District Information System for Education Plus (UDISE+) के नवीनतम आंकड़ों ने भारतीय शिक्षा परिदृश्य में एक विरोधाभासी स्थिति को उजागर किया है। जहाँ डिजिटल उपकरणों को अपनाने में वृद्धि देखी गई है, वहीं छात्रों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी डिजिटल रूप से पिछड़ा हुआ है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में, इंटरनेट कनेक्टिविटी 67.4% स्कूलों तक पहुँची, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.9 प्रतिशत अंकों की वृद्धि है।
दिलचस्प बात यह है कि हार्डवेयर का वितरण नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना में अधिक तेजी से हो रहा है। कंप्यूटर सुविधाओं वाले स्कूलों का अनुपात 2024-25 में 64.7% से बढ़कर 2025-26 में 69.9% हो गया। यह 5.2 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्शाती है कि सरकार और निजी संस्थाएं कक्षाओं में मशीनें तो पहुँचा रही हैं, लेकिन 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी'—यानी वह इंटरनेट जिसके बिना ये मशीनें अधूरी हैं—अभी भी पीछे है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि हार्डवेयर (कंप्यूटर) और कनेक्टिविटी (इंटरनेट) के बीच का यह अंतर 'खोखले डिजिटलीकरण' को जन्म दे रहा है। बिना इंटरनेट के, कंप्यूटर केवल ऑफलाइन सॉफ्टवेयर तक सीमित रह जाते हैं, जिससे छात्रों की वैश्विक शोध, रीयल-टाइम शैक्षिक प्लेटफार्मों और प्रशासनिक दक्षता तक पहुँच सीमित हो जाती है। ऐसे समय में जब AI और क्लाउड-आधारित शिक्षा मानक बन रहे हैं, 32.6% कनेक्टिविटी गैप शैक्षिक समानता के लिए एक प्रणालीगत जोखिम है।
बिना व्यापक हाई-स्पीड इंटरनेट एक्सेस के, 'कंप्यूटर साक्षरता' से 'डिजिटल दक्षता' की ओर बढ़ना असंभव है।
डिजिटल आंकड़ों के अलावा, यह रिपोर्ट स्कूल के बुनियादी ढांचे का व्यापक विवरण प्रदान करती है। बुनियादी स्वच्छता और उपयोगिताओं में भारत सरकार ने शानदार प्रगति की है। पेयजल सुविधाएं अब 99.5% स्कूलों में उपलब्ध हैं, और लड़कियों के शौचालय 98.5% स्कूलों में हैं, जो स्वच्छता और छात्राओं की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रिपोर्ट में स्टाफिंग के गंभीर मुद्दे पर भी चर्चा की गई है। एकल-शिक्षक स्कूलों की संख्या 1,04,125 से घटकर 1,00,843 रह गई है। हालांकि, यह राष्ट्रीय औसत भ्रामक है। जहाँ पाँच राज्यों ने मिलकर एकल-शिक्षक स्कूलों की संख्या में 11,000 से अधिक की कमी की, वहीं कई अन्य राज्यों में इन स्कूलों की संख्या बढ़ी है, जो शिक्षकों के आवंटन में क्षेत्रीय असमानता को दर्शाता है।
| सुविधा | 2024-25 (%) | 2025-26 (%) | वृद्धि |
|---|---|---|---|
| इंटरनेट कनेक्टिविटी | 63.5% | 67.4% | +3.9% |
| कंप्यूटर उपलब्धता | 64.7% | 69.9% | +5.2% |
| बिजली की सुविधा | - | 95.0% | स्थिर |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: UDISE+ क्या है?
UDISE+ शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली प्लस है, जो शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्कूल बुनियादी ढांचे और प्रदर्शन की निगरानी के लिए प्रबंधित एक व्यापक डेटाबेस है।
प्रश्न 2: कंप्यूटर और इंटरनेट एक्सेस के बीच का अंतर चिंताजनक क्यों है?
क्योंकि अधिकांश आधुनिक शैक्षिक संसाधन क्लाउड-आधारित हैं; बिना इंटरनेट के कंप्यूटर केवल बुनियादी ऑफलाइन कार्यों तक सीमित रहता है, जिससे वास्तविक डिजिटल लर्निंग बाधित होती है।