दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इंजीनियरिंग स्नातकों से अपील की है कि वे भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का निर्माता बनाएं। उन्होंने युवाओं से सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए नवाचार करने का आह्वान किया।
- इंजीनियरिंग स्नातकों को भारत को AI उपभोक्ता के बजाय निर्माता बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
- 'इंडिया AI मिशन' के तहत सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और स्पेस जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश किया जा रहा है।
- दिल्ली सरकार ने प्रदूषण और ट्रैफिक जैसे मुद्दों के लिए IIT दिल्ली के साथ साझेदारी की है।
- उच्च शिक्षा में भारत का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्तमान में लगभग 30% है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रेखा गुप्ता ने शनिवार को वेलोर में VIT के 41वें वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान इंजीनियरिंग स्नातकों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा इंजीनियरों को भारत को डिजिटल तकनीक के एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में सीमित रखने के बजाय, इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के रचनाकारों के एक वैश्विक केंद्र में बदलने का प्रयास करना चाहिए।
अपने उद्घाटन भाषण में, सुश्री गुप्ता ने 'इंडिया AI मिशन' के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, अंतरिक्ष, ड्रोन, रोबोटिक्स और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में एआई तकनीक का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त निवेश किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को अपनी कक्षा की शिक्षा का उपयोग समाज की ज्वलंत समस्याओं को हल करने के लिए करना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह तकनीक का उपयोग करने वाला देश बना रहता है या उसे बनाने वाला। यदि भारतीय इंजीनियर केवल मौजूदा सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, तो भारत केवल एक बाजार बनकर रह जाएगा। लेकिन यदि वे स्वयं के एल्गोरिदम और हार्डवेयर विकसित करते हैं, तो भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे दिल्ली सरकार ने IIT दिल्ली के साथ मिलकर राजधानी की प्रमुख चुनौतियों जैसे प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और कचरा प्रबंधन के समाधान खोजने के लिए साझेदारी की है। उन्होंने इंजीनियरों को केवल कौशल निखारने तक सीमित न रहकर, समाज के प्रति सहानुभूति और मजबूत चरित्र विकसित करने की भी सलाह दी।
भारत का 'मेक, इन्वेस्ट, डिजाइन और ब्रांड इन इंडिया' का दृष्टिकोण केवल युवा इंजीनियरिंग दिमागों द्वारा ही आगे बढ़ाया जा सकता है।
VIT के संस्थापक और चांसलर जी. विश्वनाथन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) लगभग 30% है, जो दक्षिण कोरिया (90%), जापान और चीन (60%) जैसे एशियाई देशों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे 50% तक ले जाना है।
इस दो दिवसीय समारोह में 11,276 स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों सहित कई शोधकर्ताओं और स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सुश्री गुप्ता ने परिसर में सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन बैक्टीरियोफेज एंड इंफेक्शन डिजीज (CARBID) का भी उद्घाटन किया, जिसे ICMR और VIT द्वारा संयुक्त रूप से प्रायोजित किया गया है।
Frequently Asked Questions
1. मुख्यमंत्री ने इंजीनियरों को क्या सलाह दी?
मुख्यमंत्री ने सलाह दी कि इंजीनियरों को केवल कौशल विकसित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक समस्याओं को हल करने और भारत को AI निर्माता बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
2. भारत का उच्च शिक्षा नामांकन अनुपात (GER) क्या है?
वर्तमान में भारत का GER लगभग 30% है, जिसे नई शिक्षा नीति के माध्यम से 50% करने का लक्ष्य रखा गया है।