गिटाम डीम्ड विश्वविद्यालय ने अपना 17वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जिसमें इंजीनियरिंग, प्रबंधन और विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों के 3,052 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

  • कुल 3,052 छात्रों को विभिन्न शैक्षणिक स्तरों पर डिग्रियां प्रदान की गईं।
  • नीति आयोग के सदस्य रामस्वामी बालसुब्रमण्यम को मानद डॉक्टर ऑफ लेटर्स (D.Litt.) से सम्मानित किया गया।
  • केंद्रीय मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने एआई (AI) और निरंतर कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया।

विशाखापत्तनम: गिटाम डीम्ड विश्वविद्यालय ने रविवार को अपने 17वें दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया। इस प्रतिष्ठित समारोह में इंजीनियरिंग, प्रबंधन, विज्ञान, मानविकी, वास्तुकला और फार्मेसी जैसे विविध विषयों के 3,052 स्नातकों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए डिग्रियां प्रदान की गईं।

स्नातक होने वाले छात्रों के समूह में 2,146 स्नातक (Undergraduate), 750 स्नातकोत्तर (Postgraduate) और 156 डॉक्टरेट शोधार्थी शामिल थे। शैक्षणिक उत्कृष्टता प्रदर्शित करने वाले 29 छात्रों को स्वर्ण पदक से नवाजा गया। समारोह की अध्यक्षता गिटाम के अध्यक्ष और सांसद एम. श्रीभारत ने की, जबकि चांसलर वीरेंद्र सिंह चौहान ने स्वागत भाषण दिया।

मानद उपाधि और विशिष्ट सम्मान

समारोह का एक मुख्य आकर्षण नीति आयोग के सदस्य रामस्वामी बालसुब्रमण्यम को मानद 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' (D.Litt.) की उपाधि प्रदान करना रहा। यह सम्मान उन्हें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व नेतृत्व और नीतिगत योगदान के लिए दिया गया।

तकनीकी युग में अनुकूलन की आवश्यकता

मुख्य अतिथि, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने छात्रों को संबोधित करते हुए भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स पेशेवर परिदृश्य को तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आज के प्रासंगिक कौशल भविष्य में अप्रचलित हो सकते हैं, इसलिए छात्रों को निरंतर 'अपस्किलिंग' (Upskilling) पर ध्यान देना चाहिए।

परिवर्तन को एक बाधा के रूप में देखने के बजाय, इसे समुद्र की लहर की तरह स्वीकार करें और अनुकूलन की कला में महारत हासिल करें।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत जैसे उभरते आर्थिक शक्ति वाले देश में, तकनीकी व्यवधानों के बीच केवल वही पेशेवर टिक पाएंगे जो सीखने की प्रक्रिया को कभी नहीं रोकेंगे। श्रीभारत ने भी छात्रों को तकनीकी विकास के प्रति जिज्ञासु और सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गिटाम विश्वविद्यालय (पूर्व में गांधीनगर इंजीनियरिंग कॉलेज) दक्षिण भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है, जिसने दशकों से उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस दीक्षांत समारोह में कुल कितने स्वर्ण पदक विजेता थे?
उत्तर: इस वर्ष कुल 29 छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 2: मुख्य अतिथि ने छात्रों को क्या सलाह दी?
उत्तर: मुख्य अतिथि ने एआई के दौर में निरंतर सीखने और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी।

Did You Know?: गिटाम विश्वविद्यालय ने इस वर्ष इंजीनियरिंग से लेकर फार्मेसी तक के विविध क्षेत्रों में हजारों छात्रों को प्रशिक्षित किया है।