चेन्नई के राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज के 25वें दीक्षांत समारोह में 1,968 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर ने छात्रों को निरंतर सीखने और पारदर्शिता के महत्व पर जोर दिया।
- राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज ने अपना 25वां दीक्षांत समारोह सफलतापूर्वक संपन्न किया।
- कुल 1,968 छात्रों को उनकी डिग्री और शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
- स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर ने 'लर्न, अनलर्न और रीलर्न' के सिद्धांत को भविष्य की कुंजी बताया।
- समारोह में 83 स्वर्ण पदक विजेता और 10 पीएच.डी. स्नातकों को भी सम्मानित किया गया।
चेन्नई स्थित प्रतिष्ठित राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज ने रविवार को अपने 25वें दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर कुल 1,968 छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने पर डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर ने नव स्नातक छात्रों को जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाए।
अपने संबोधन के दौरान, जे.सी.डी. प्रभाकर ने आधुनिक युग की सबसे बड़ी चुनौती और अवसर की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि भविष्य केवल उन्हीं का है जो निरंतर परिवर्तन के साथ तालमेल बिठाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने छात्रों को 'सीखने (Learn), पुरानी धारणाओं को छोड़ने (Unlearn) और फिर से सीखने (Relearn)' की प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सफलता का पैमाना केवल ऊंचे पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आज के तेजी से बदलते तकनीकी युग में, केवल पारंपरिक डिग्री पर्याप्त नहीं है। प्रभाकर का संदेश 'अनलर्निंग' (Unlearning) की क्षमता पर केंद्रित है, जो एआई (AI) और ऑटोमेशन के दौर में कौशल विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह छात्रों को केवल डिग्री धारक नहीं, बल्कि 'लाइफ-लॉन्ग लर्नर्स' बनने के लिए प्रेरित करता है।
"भविष्य उनका है जो सीखने, भूलने और फिर से सीखने की इच्छा रखते हैं।" - जे.सी.डी. प्रभाकर
समारोह के दौरान राजलक्ष्मी ग्रुप के वाइस-चेयरमैन अभय मेगनथन ने संस्थान की रजत जयंती (Silver Jubilee) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मील का पत्थर न केवल छात्रों की शैक्षणिक सफलता है, बल्कि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
इस गौरवशाली अवसर पर शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रदर्शन करते हुए, 17 स्नातक (Undergraduate) और 9 स्नातकोत्तर (Postgraduate) कार्यक्रमों से कुल 83 स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, 10 शोधार्थियों को उनकी पीएच.डी. उपाधि प्रदान की गई। समारोह में कॉलेज के प्रिंसिपल एस.एन. मुरुगेसन सहित प्रबंधन समिति के सदस्य और कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज ने पिछले दो दशकों में इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में एक मानक स्थापित किया है। अपने 25वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, संस्थान ने तकनीकी शिक्षा और नवाचार के माध्यम से हजारों इंजीनियरों को वैश्विक कार्यबल में शामिल होने के लिए तैयार किया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज के 25वें दीक्षांत समारोह में कितने छात्र शामिल हुए?
उत्तर: इस समारोह में कुल 1,968 छात्रों को उनकी डिग्री प्रदान की गई।
प्रश्न 2: स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर ने सफलता के बारे में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि सफलता केवल पद से नहीं, बल्कि आपके ज्ञान और कार्यों से समाज में लाए गए सकारात्मक बदलाव से मापी जानी चाहिए।