IIT दिल्ली के एमएससी भौतिकी छात्र ऋषिकेश कुमार की संदिग्ध मृत्यु के बाद छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के कारण संस्थान ने बाहरी जांच समिति का गठन किया है। दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपी जानी है।

  • एमएससी भौतिकी छात्र ऋषिकेश कुमार की मृत्यु के बाद बाहरी जांच का आदेश।
  • जांच समिति में पूर्व डीजीपी अशोक कुमार और एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा प्रमुख शामिल।
  • छात्रों ने प्रशासन की जवाबदेही और डीन के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
  • संस्थान ने मृतक के परिवार के लिए वित्तीय सहायता और नए मेंटर सिस्टम का वादा किया।

IIT दिल्ली में एमएससी भौतिकी के छात्र ऋषिकेश कुमार की संदिग्ध मृत्यु के बाद उपजे तनाव के बीच, संस्थान ने एक उच्च स्तरीय बाहरी जांच समिति का गठन किया है। यह निर्णय कैंपस में छात्रों द्वारा किए गए व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद लिया गया है, जिसमें छात्र प्रशासन की भूमिका और मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे थे।

IIT दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंजन बनर्जी ने पुष्टि की है कि यह समिति कुमार की मृत्यु से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच करेगी। समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। इस जांच दल में उत्तराखंड के पूर्व महानिदेशक पुलिस (DGP) अशोक कुमार, एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शर्मा, एक छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार शामिल हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक छात्र की मृत्यु का नहीं है, बल्कि भारत के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और संकट प्रबंधन प्रणालियों की विफलता को भी उजागर करता है। छात्रों का बढ़ता आक्रोश यह दर्शाता है कि संस्थान के भीतर सुरक्षा और सहायता तंत्र में गहरी खामियां हो सकती हैं।

छात्रों का विरोध केवल एक घटना के खिलाफ नहीं, बल्कि संस्थान के भीतर व्याप्त जवाबदेही की कमी के खिलाफ एक संगठित संघर्ष है।

संस्थान के अनुसार, ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में एमएससी कार्यक्रम में प्रवेश लिया था और वह शिवालिक हॉस्टल में रहते थे। संस्थान ने बताया कि मार्च 2026 में उनके मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे सामने आए थे, जिसके बाद उन्हें माता-पिता की निरंतर निगरानी में रहने की सलाह दी गई थी। संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि कुमार ने स्वास्थ्य कारणों से सेमेस्टर से ब्रेक भी लिया था।

विरोध प्रदर्शन के बाद, IIT दिल्ली ने मृतक के परिवार को वित्तीय सहायता देने और चिकित्सा खर्चों की प्रतिपूर्ति करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, संस्थान ने छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक ओम्बुड्सपर्सन (Ombudsperson) का पद सृजित करने और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए एक नया 'मेंटर सिस्टम' शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।

हालांकि, संस्थान के इस कदम से छात्रों में पूर्ण संतुष्टि नहीं दिख रही है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने छात्र कल्याण अधिष्ठाता (Dean of Student Affairs), एसोसिएट डीन और भौतिकी विभाग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग की थी, जिसे संस्थान के वर्तमान आधिकारिक बयान में संबोधित नहीं किया गया है।

Did You Know?: IIT दिल्ली भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक है, जहाँ प्रतिस्पर्धा का स्तर अत्यधिक उच्च होता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: जांच समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
उत्तर: समिति में पूर्व डीजीपी अशोक कुमार, एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शर्मा और एक छात्र प्रतिनिधि शामिल हैं।

प्रश्न 2: छात्रों की मुख्य मांग क्या थी?
उत्तर: छात्र एक स्वतंत्र जांच और संबंधित विभाग के प्रमुखों और डीन के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।