IIT दिल्ली में एम.एससी भौतिकी के छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित तौर पर आत्महत्या करने के बाद परिसर में तनाव का माहौल है। छात्र प्रशासन की जवाबदेही और अधिकारियों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- एम.एससी भौतिकी के छात्र ऋषिकेश कुमार ने परिसर की छठी मंजिल से कूदकर जान दी।
- छात्रों का आरोप है कि 2023 से संस्थान में अब तक आठ आत्महत्याएं हो चुकी हैं।
- प्रदर्शनकारी छात्र कल्याण के एसोसिएट डीन प्रोफेसर श्रीदेवी उपाध्याय के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- IIT दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने फिलहाल इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया है।
नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक, IIT दिल्ली में उस समय भारी तनाव व्याप्त हो गया जब शनिवार को एक दुखद घटना ने पूरे परिसर को झकझोर कर रख दिया। 31 वर्षीय ऋषिकेश कुमार, जो एम.एससी भौतिकी के छात्र थे, ने कथित तौर पर परिसर की एक इमारत की छठी मंजिल से कूदकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना के बाद से ही छात्रों में गहरा आक्रोश है और वे प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
बढ़ता आक्रोश और छात्रों की मांगें
मंगलवार सुबह, स्थिति तब और गंभीर हो गई जब IIT दिल्ली के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के भीतर 500 से अधिक छात्र जमा हो गए, जबकि लगभग 2,000 अन्य छात्र परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों ने न केवल इस घटना के लिए जवाबदेही मांगी है, बल्कि उनकी प्रमुख मांगों में प्रोफेसर श्रीदेवी उपाध्याय (एसोसिएट डीन, छात्र कल्याण) का इस्तीफा और इस मामले की स्वतंत्र जांच शामिल है। इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की भी मांग की जा रही है।
छात्रों का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। उनके अनुसार, 2023 से अब तक संस्थान में यह आठवीं आत्महत्या है। यह आंकड़ा संस्थान के मानसिक स्वास्थ्य ढांचे और छात्रों के बढ़ते दबाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
संस्थान के भीतर छात्रों के बढ़ते मानसिक तनाव और बार-बार होने वाली इन घटनाओं ने शैक्षणिक व्यवस्था की विफलता को उजागर कर दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आईआईटी जैसे उच्च-दबाव वाले शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर संकट बनता जा रहा है। जब छात्र प्रशासन के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर संगठित होते हैं, तो यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि संस्थागत विफलता का संकेत है। यदि इन मांगों को समय रहते नहीं सुना गया, तो यह शैक्षणिक माहौल और संस्थान की प्रतिष्ठा को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: शैक्षणिक दबाव का संकट
भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों के बीच आत्महत्या की दरें पिछले कुछ वर्षों में चिंता का विषय बनी हुई हैं। अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, शोध का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं अक्सर छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ देती हैं। IIT दिल्ली जैसी संस्था, जो अपनी उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है, अब इस संकट के केंद्र में है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: छात्र प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?
उत्तर: छात्र मुख्य रूप से एसोसिएट डीन श्रीदेवी उपाध्याय के इस्तीफे, मामले की स्वतंत्र जांच और पीड़ित परिवार को मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
प्रश्न 2: क्या संस्थान ने अब तक कोई कार्रवाई की है?
उत्तर: IIT दिल्ली के निदेशक ने वर्तमान में इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया है, हालांकि पुलिस ने मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।